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Showing posts from 2021

थोड़ा और की चाह Thoda aur ki chah - Hindi poem

थोड़ा और की चाह ( हिंदी कविता)/ Thoda aur ki chah(Hindi Poem) ( कभी कभी हम उन खुशियों को नहीं देख पाते या उनकी कद्र नहीं करते जो हमारे आस पास  होती हैं।हमें ज्यादा की चाह इतनी हो जाती है कि कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते हैं चाहे वो रास्ता गलत ही क्यूं ना हो, जो बाद में हमें सिर्फ बदले में दुख देती है। जीवन में सुख दुख आते रहते हैं। हमें उनका समान रूप से स्वागत करना चाहिए और अडिग होकर अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।जो कमजोर हो जाते हैं वो सब कुछ खो देते हैं।) इन्हीं भावनाओं को उकेरती ये कविता प्रस्तुत है:-   थोड़ा और की चाह थोड़ा और की चाह में  जो पास है वो मत गवाना, अथाह खुशियों की चाह में कहीं गमों को ना समेट लेना। छोटी छोटी खुशियां भी जिंदगी में रंग भर देती हैं, थोड़ा और की जिद, इसमें कड़वाहट घोल देती है। जैसे दिन के बाद रात आती है खुशियां भी अपना रंग बदलती है, कभी उदासी कभी आंसू बनकर जीवन के रंगमंच में भूमिका निभाती है। थोड़ा सब्र कर जिंदगी के टेढ़े मोड़ पर कर ले हर पल की तू  बंदगी, तपकर तू बनेगा एक दिन सोना विकल होकर खुदको मत खोना। रास्ते में नहीं बिछे होंगे फूल सदा कांटे भी मिलेंगे

वक़्त के सीने में Waqt ke seene mein

  वक़्त के सीने में (हिंदी कविता)/Waqt ke seene mein (Hindi poem) (कालचक्र ने हमेशा ही संसार को नये नये दौर दिखाए हैं। इन परिस्थितियों में हम सब को हमेशा ही मिलकर भाई चारे का भाव लिए कठिन समय का सामना करने की आवश्यकता रही है।चाहे वह कोई प्राकृतिक आपदा हो या युद्ध जैसे विनाशकारी संकट हो।आज हम जिस समसामयिक संकट से जूझ रहे हैं उससे ओतप्रोत छोटी सी कविता प्रस्तुत है:-) वक़्त के सीने में हम बांधते हैं वक़्त को एक पैमाने में कभी साल कभी दिन कभी महीने में कई दौर गुजर जाते हैं वक़्त के सीने में हम उलझे रहते हैं जन्म-मृत्यु के जाल में नहीं मज़ा  है बेमतलब सुख चैन खोने में क्यूं इंसान खुश नहीं है एक साथ होने में दिन रात बिता देते है दूसरों को तौलने में खुद भले ही हों बदनाम  पूरे महकमे में दुनिया को दिखाया है भविष्य,वक़्त ने आइने में खड़ा है तू विकराल मुंह खोले मौत के दरवाजे में कुछ ही फासला होता है जान गवाने में अरसे निकल जाते हैं गुजर बसर जुटाने में जान हलक में रख बीती है 2020 कोविद-19 में दो हजार इक्कीस थोड़ी मिसरी घोल जाए जीवन में आओ जगा कर प्रेम भाव अपने मन के कोने में  लग जायें हम सब प्रकृत