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याद है ना तुम्हें Yaad hai na tumhen - A Hindi poem (हिंदी कविता)

याद है ना तुम्हें Yaad hai na tumhen- Hindi poem (हिंदी कविता)
याद है ना तुम्हें / Yaad hai na tumhen याद है ना तुम्हें.. पहली दफा, जब कलम मेरी बोली थी तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां मैंने पिरोई थी।
तुम्हारे गुजरे पलों में बेशक मैं नहीं थी तुम्हारे संग भविष्य की अपेक्षा भी नहीं थी हां,वर्तमान के कुछ चंद क्षण साझा करने की ख्वाहिश जरुर थी।
याद है ना तुम्हें.. पहली दफा, जब कलम मेरी बोली थी तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां मैंने पिरोई थी।
देखो, आज फिर उंगलियों ने मेरी कलम उठाई है कुछ अनसुनी भावनाओं को संग अपने समेट लाई है माना ,मेरे शब्दों ने आहत किया तुम्हें लेकिन क्या,असल भाव को पहचाना तुमने?
याद है ना तुम्हें.. पहली दफा, जब कलम मेरी बोली थी तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां मैंने पिरोई थी।
उलझ गए तुम निरर्थक शब्दों में पढ़ा नहीं जो लिखा है कोमल हृदय में चल दिए छोड़ उसे, तुम अपनी अना में बंधे थे हम तुम, जिस अनदेखे रिश्ते की डोर में
याद है ना तुम्हें.. पहली दफा, जब कलम मेरी बोली थी तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां मैंने पिरोई थी।
बीत गए कई बारिश के मौसम क्या धुले नहीं, जमे धूल मन के? है अर्जी मेरी चले…
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धरा / धरती /Dhara/Dharti (Earth) - A Hindi poem

धरा / धरती /Dhara / dharti/Earth - A hindi poem( हिंदी कविता)
धरा/धरती /पृथ्वी पर कविता धरा,माता है हम इनकी संतान सर्वत्र हरियाली,है इसकी शान विविधता है इसकी पहचान।
माटी के हैं कई रंग वन और वन्य जीव हैं इनके अंग सदा ही प्रेम दिया है धरा ने मानव को पुलकित होती जैसे देख माता बच्चों को।
दात्री है धरा पर हमने है क्या दिया? सर्वदा ही उपभोग किया सुखों का कभी न समझा मर्म, धरा के दुखों का।
स्वार्थ में अंधे होकर हम वीरान कर रहे धरा को हरियाली है श्रृंगार इसका बना रहे बंजर इसको।
फैला कर प्रदूषण माता के मातृत्व का कर रहे हम दोहन वक़्त रहते हम संभल जाएं..
धरा रूपी माता को  निर्बाध वात्सल्य बरसाने दें, तभी विश्व में होगी खुशियाली समस्त जगत होगी स्वस्थ और निरोगी और  ये धरती भी होगी बलिहारी।
(स्वरचित) :- तारा कुमारी
(कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए तो मेरे उत्साहवर्धन हेतू अपना आशीर्वाद दें।और कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है। ) 
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संकल्प / Sankapl / प्रतिज्ञा / Pratigya/इरादा / Irada/ (Determination) - A Hindi Poem

संकल्प/Sankalp/प्रतिज्ञा/ pratigya/ इरादा irada/ Determination - हिंदी कविता
संकल्प / प्रतिज्ञा / इरादा इरादा जो हो सर्वस्व कल्याणकारी जन-जन के हित में जो हो लाभकारी लाख रोड़े खड़े हो जाएं तो क्या दृढ़ निश्चय से कर लो मुट्ठी में दुनिया सारी।
ये जगत है फूल और कांटों की क्यारी संकल्प ना टूटे कभी रखो इनसे ऐसी यारी जीवन छोटी है तो क्या पक्के इरादों से खेलो अपनी पारी।
कर्तव्य पथ पर पदयात्रा रखो जारी कंधों पर हो चाहे जिम्मेदारी भारी कभी गर मुंह की खानी पड़ी तो क्या हार के बाद जीत होती है सबसे प्यारी।
(स्वरचित) :- तारा कुमारी
(संकल्प/प्रतिज्ञा/इरादा पर ये कविता - कैसी लगी आपको ?जरूर बताएं। यदि पसंद आए तो मेरे उत्साहवर्धन हेतू अपना आशीर्वाद दें।और कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है। ) 
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मातृत्व / Matritwa / Motherhood - A Hindi poem

मातृत्व /   Matritwa / Motherhood - A Hindi poem ( हिंदी कविता) / मातृत्व पर कविता
      मातृत्व पर कविता नन्हीं सी धड़कन जब स्त्री के कोख में धड़कनों के संग लय मिलाती है,  वह क्षण स्त्री के लिए मातृत्व का अनमोल प्रतीति होती है..  स्त्री स्वत: ही मां में परिवर्तित हो जाती है।
मां और अजन्मे बच्चे का अटूट रिश्ता अंतिम सांस तक बंध जाता है, सुकोमल रुई के फाहे सी संतानें जब माता की गोद भर जाते हैं, तब मां सिर्फ एक स्त्री नहीं.. मौत को मात देकर स्वयं के अंश की जननी बन जाती है।
मां बच्चे के लिए हर दुख उठाती है हर खुशियां उन पर निछावर करती है जीवन की पहली शिक्षिका माता ही तो होती है हर कठिनाइयों से पार पाने का मंत्र बड़े प्यार से मां बच्चे को सिखलाती है।
मां की मातृत्व की व्याख्या नि:शब्द है, जीवन की हर झंझावात की पहरेदार मां ही तो होती है, जीवन-मरण के चक्र में.. स्वर्ग भी मां और ईश्वर की किरदार भी मां होती है ।
(स्वरचित) :- तारा कुमारी More poems you may like:-1. बेटियां
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बेटियाँ/ Betiyan / (Daughters) - A Hindi poem

बेटियाँ/ Betiyan / (Daughters) - A Hindi poem (हिंदी कविता)
        बेटियाँ /बेटी पर कवितारिश्तों की एक खूबसूरत एहसास होती हैं बेटियाँ घर की रौनक, उदासियों में खिलखिलाहट अंधियारे में उजियारा होती हैं बेटियाँ.. जीवन डगर की बेशकीमती सौगात होती हैं ये बेटियाँ।
निश्छल मन के भावों से ओतप्रोत चिलचिलाती धूप में भी शीतल छांव होती हैं बेटियाँ उम्र के हर पड़ाव में, हर सुख-दुख में, माता-पिता की परछाई होती हैं ये बेटियाँ।
जग कहे पराया धन बेटी को पर इंद्रधनुष के सात रंगों की तरह कभी मां, कभी बहन.. ना जाने कितने रिश्तों में बंध जाती हैं ये बेटियाँ।
जब हर रिश्ते साथ छोड़ जाते हैं तब पूर्ण समर्पण से अडिग साथ खड़ी रहती हैं ये  बेटियाँ मां की ममता में पली,पिता के गर्व में लिपटी स्वर्ग से उतरी परी होती हैं ये बेटियाँ।
परिवार को एक डोर में पिरोकर रखती हैं ये बेटियाँ कम नहीं ये किसी से.. यूं समझ लो - बेमिसाल होती हैं बेटियाँ रिश्तों की एक खूबसूरत एहसास होती हैं बेटियाँ।।
(स्वरचित) :-तारा कुमारी
(कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए तो मेरे उत्साहवर्धन हेतू अपना आशीर्वाद दें।और कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे आपके सुझ…

बादल Badal/Cloud - Hindi poem

बादल /Badal/Cloud - hindi poem (हिन्दी बाल - कविता)   क्या आपने कभी  नीले आसमान में बादलों को  अठखेलियां करते  देखा है?  बादलों को स्वच्छ नीले आसमान में देखना अभूतपूर्व होता है.. आइए, आज हम  आसमान में बिखरे  बादलों  को कविता के माध्यम से  करीब से देखें.. बादलों की कहानी कहती हुई प्रस्तुत है मेरी यह कविता...
  बादल (बाल कविता) उमड़ते घुमड़ते श्वेत चमकीले बादल  संग है इसके नीले आसमान की चादर  ये छोटे बादल, बड़े बादल, सयाने बादल  कभी ये भालू कभी खरगोश की भांति दिखते  बच्चों के मन को ये खूब भाते जरा, इन बादलों की मस्ती तो देखो..  सूरज के संग खेलते ये आंख मिचौली  कभी नारंगी कभी पीत रंग से खेलते ये होली  कभी शांत-चित्त  बिछ जाते आसमान के बिछौने में  कभी खिसकते धीमे-धीमे हवा के मंद चाल में  कभी दूधिया बर्फ-सी पर्वतों के सदृश्य अटल दिखते  हरदम मुस्कुराते आसमान में ये अपनी सुंदरता की छटा बिखेरते  जब आ जाता वर्षा ऋतु..  आते ही ये अपना रंग बदल लेते श्वेत उज्जवल काया को छोड़कर  काला स्याह रूप धर लेते  बिजली रानी भी तब रह रहकर  चमक अपनी दिखाती बादल भी तब गढ़-गढ़ करके खूब ताल मिलाते ।  हवा भी कभी …

सपनें Sapne - A Hindi poem (Motivational poem)

सपनें /Sapne - A Hindi poem (हिन्दी कविता)   हताशा और निराशा कभी भी आशाओं से बढ़कर नहीं होनी चाहिए। जीवन में हार को भी जीत में बदलने की प्रेरणा देती यह कविता आपके समक्ष प्रस्तुत है:-   सपनें कुछ सपने छूट जाते हैं  कुछ सपने टूट जाते हैं और कुछ सपने रूठ जाते हैं।  टूटे सपने घाव दे जाते हैं  जो छूट जाते हैं वो पूरे कब होते हैं  रूठे सपनों में छिपी आशाएं होती हैं  पर आस भी जब टूट जाए तो  ह्रदय में बस  खालीपन घर कर जाते हैं।  मायूस ना होना,  अगर ये लम्हे मिल जाएँ कभी।  सपने तो कुछ टूटेंगे ही  कुछ पूरे होंगे और कुछ रूठेंगे ही  जो मिल गया वह भी कम नहीं  जो ना मिला तो ठहरो नहीं..  हार-जीत तो जीवन की रीत है  धैर्य, साहस और आत्मजय ही मनमीत हैं।  टूटे सपनों को जोड़ना सीख ले जो  जीवन के सतरंगी जंग जीत ले वो कर दृढ़ निश्चय, पथ पर आगे बढ़ो  मुट्ठी में कर लो अपने लक्ष्य को  कर लो सपने पूरे, अपने मन की..।
(स्वरचित)  :-तारा कुमारी

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अनकहे किस्से Ankahe kisse - Hindi poem

अनकहे किस्से /Ankahe kisse
- Hindi poem (हिन्दी कविता)
  अनकहे किस्से..  बेपनाह प्यार है तुम्हारे लिए  लेकिन इस दिल में सिर्फ तुम ही नहीं,  प्यार के गीत गुनगुनाती हूं तुम्हारे लिए पर उनको भी सहेज कर रखती हूँ दिल में अपने।  अगर मायने रखते हो तुम मेरे जीवन में वो भी मुस्कुराते हैं मेरे अफ़साने में मेरी हंसी मेरी उदासी में  हो अगर तुम परछाई मेरी  उनके बिना मैं अधूरी हूँ  मेरी खुशी मेरे हर ग़म में।  माना कि मेरी बेइंतेहा चाहत हो तुम पर उनका भी मान ना होगा कभी कम माँ, जिसने मुझे जन्म दिया पिता, जिसने सर पर
सदैव स्नेहिल हाथ रखा।  वो भाई-बहन जिसके अप्रतिम प्रेम ने मुझे
हमेशा ही तृप्त किया।  वो दोस्त जो निस्वार्थ भाव से  मेरे सुख-दुख के साथी बनते रहे  नहीं जताते कभी कोई हक वो मुझ पर पर दिल में सदा ही बसते हैं वो मेरे।  प्रिय, हो तुम प्रियतम मेरे जो फूल खिलाए हमने मिलकर उसके भी नाम है मेरे ह्रदय का एक टुकड़ा  मेरी सत्ता को मिलकर पूरा करते हैं ये सारे।  बेशक,  जीवन के हमसफर हो तुम  मेरा तन मन ह्रदय तुम्हें समर्पित है
पर सच तो ये भी है...
मेरे वजूद के कई किस्से हैं,  इस दिल के कई हिस्से हैं।
(…

आऊँगा फिर Aaunga phir - Hindi poem

आऊँगा फिर... /Aaunga phir... A Hindi poem     प्रेम में डूबे अधीर मन को थोड़ी तसल्ली और धैर्य बंधाते हुए एक प्रियतम की अपनी प्रियतमा के लिए उभरे भावनाओं को उकेरती प्रस्तुत कविता... 

   आऊँगा फिर..  जो है तेरे मन में  वही मेरे मन में 
न हो तु उदास  तू है हर पल मेरे पास 
अभी उलझा हूँ जीवन की झंझावतों में  रखा हूँ सहेजकर तुझको हृदय-डिब्बी में 
जरा निपट लूँ उलझनों से आऊँगा फिर नई उमंग से 
करना इंतजार मेरा तू मैं जान हूँ तेरी,जान है मेरी तू 
न हो कम विश्वास कभी हमारा चाहे जग हो जाए बैरी सारा
इन फासलों का क्या है...  जब मेरे हर साँस हर क्षण में बसी सिर्फ तू ही तू है |
(स्वरचित)  :-तारा  कुमारी 
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प्रेम - तृष्णा /Prem - Trishna - A Hindi - poem

प्रेम - तृष्णा / Prem - Trishna :- A Hindi-poem
     प्रेम - तृष्णा शुष्क रेगिस्तान में  शीतल प्रेम की एक बूंद की चाह तपते अग्नि सी बंजर भूमि में  ओस-सी प्रेम की एक बूंद की चाह
मृग तृष्णा सी प्रेम की तृष्णा
भटकते छटपटाते मन के भाव
आस देख दौड़ चला उस ओर
पास जाकर कुछ ना मिला
मिली तो बस तपती शब्दों की चुभन
मन को दुखाती कड़वाहट की तपन
बुझ ना पायी मन की तृष्णा
कैसी है ये व्यथा कैसी ये घुटन
पुष्प रूपी कोमल हृदय को
निराशा और वेदना, और घेर आई
प्रेम की चाह ये कहाँ ले आई?
दर्द के समंदर में गोते लगाते रहे
पर साहिल कभी नजर न आई..।

:-स्वरचित
(तारा कुमारी)

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