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बे सिर पैर की ख्वाहिशें be sir pair ki khawahishen - Hindi poem

बे सिर पैर की ख्वाहिशें - हिंदी कविता/ Be sir pair ki khawahishen - Hindi poem. बे सिर पैर की ख्वाहिशें बस इतनी सी थी आरजू , मुझे जब दर्द हो... आपके दिल में दस्तक हो।   अगर रूठ जाऊं मैं, जमीं आसमां एक कर दे वो.. रिश्ते में कुछ ऐसी बात हो।  मेरे उल्टे सीधे अल्फाजों में भी,   बेइंतेहा प्यार ढूंढ़ ले जो..  ऐसी नज़रें मुझे इनायत हो।  नाज़ नखरे और झगड़ों के बीच बारी जब साथ देने की आए..  तो दोनों ओर से उल्फत हो। आए थे जमाने में जुदा-जुदा लेकिन जब जाने की बात हो.. हम साथ - साथ रुखसत हो। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) होली की खुमारी 2) खामोशियों में लिपटी चाहतें 3) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता 4) एक पड़ाव 5) फरेब 6) रिश्ते टूटे नहीं हैं 7) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 8) थोड़ा और की चाह 9) जरूरी है
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होली की ख़ुमारी Holi ki Khumaari - Hindi poem

 होली की खुमारी - हिंदी कविता/ Holi ki khumaari - Hindi poem  इस वर्ष हम सब कोविड -19 के प्रकोप के साथ होली का त्यौहार मनाने के लिए बाध्य हैं। त्यौहार हमारे लिए जितना खास महत्व रखता है उतना ही जरूरी हमारी सुरक्षा भी है जिसे हम अनदेखा नहीं कर सकते। सावधानियों के साथ त्यौहार की खुशियों और एहसास को महसूस करने की मशविरा देती हुई ये छोटी सी कविता प्रस्तुत है:- होली की खुमारी  मन में है होली की खुमारी, पर भूल ना जाना सामाजिक दूरी। नासपीटे कॉरोना ने त्यौहार में खलल है डाली, प्रक्षालक और नासिकामुखसंरक्षक कीटाणुरोधी वायुछानक वस्त्र डोरी युक्त पट्टिका ने खतरे को है टाली। राग, द्वेष और बैर को गुलाल संग हवा में उड़ा कर, प्रेम ,स्नेह और अपनेपन की खुशबू चौतरफा महका कर। दुख व कटु अनुभवों को रंगों में धोकर भाईचारे का संदेश हृदय में प्रस्फुटित कर। नई उमंग और खुशियों को गले लगाना है, मिलकर..पैर पसारती कोरोना को दूर भगाना है । माना,मन में है होली की खुमारी पर अपनी सुरक्षा भी है बहुत जरूरी। दो गज की रहे दूरी,पर रहे ना दिलों में दूरी कर लो ऐसे ही.. मन के भावों को पूरी। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (1)प्रक्षालक

खामोशियों में लिपटी चाहतें khamoshiyon mein lipti chaahten - Hindi poem

 खामोशियों में लिपटी चाहतें - हिंदी कविता / khamoshiyon mein lipti chaahten - Hindi poem (कहते हैं, जब किसी से हम प्यार करने लगते हैं या करते हैं तो उनकी हर भावनाओं को बिना कहे समझते हैं या महसूस कर लेते हैं।लेकिन  जब कभी हम अपनी उम्मीदों को ही सिर्फ सर्वोपरि देखने लगते हैं तब परिस्थितियां उलझ जाती हैं। सामने वाले के हसरतों और उम्मीदों को समान महत्व ना देने से उनके लिए सब कुछ कितना कठिन हो जाता है हम समझ ही नहीं पाते। इन्हीं भावनाओं से लिपटी ये छोटी सी कविता प्रस्तुत है:- ) खामोशियों में लिपटी चाहतें दिल में मचलते हैं.. कई छोटी - छोटी बातें और ख्वाहिशें.. लेकिन जब भी  सूक्ष्म भावों को उनसे बांटने की  सोचता ये मन उनकी ही बातों का  रेला चल पड़ता। और ये नन्हा दिल बस मुस्कुरा कर कारवां में साथ हो लेता। उनकी हंसी के संग मैं भी चहक लेती। नमी जब उनकी  आंखों में दिखती, तो अपनेपन की  गरमाहट से  सफर की थकान  कम कर देती। कोई  तीखा तीखा मिलता तो कसकर हाथ थाम लेती। और मुश्किलों को उनकी आधा - आधा बांट लेती। पर जब होता मेरा सामना.. दबी छुपी कुछ  मेरे अरमानों से.. वो कहीं साथ दिखते नहीं, मेरे जज्बातों

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता mahila diwas par kavita - Hindi Poem

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता(हिंदी कविता)/ Antarashtreey Mahila diwas(hindi poem) / Poem on women's day. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता(  International women's day) तोड़ लो मुझे चाहे जितना निरीह प्राणी जानकर, लांछन लगा लो चाहे जितना अबला स्त्री मानकर। जब हाथ ना लगा सके तो, अंतर्मन की दृढ़ता पर प्रहार कर शीश झुकाने की  कर लो कोशिशें चाहे जितनी। चोट खाकर हीरे-सी कठोर रूप धर चुकी हूं मैं, पहले से और भी खूबसूरत हो चुकी हूं मैं। फ़र्क करना सिखा दिया है वक़्त और जमाने ने, किस बात को हृदय से लगाना है किसे दूर से ही इंकार कर देना है। अब ना चलेगा कोई छल तुम्हारा मेरी सरल भावनाओं पर, ना होंगी आहत अब मेरा कोमल मन विषैले, मिथ्या दंभ और कटु वचनों से। लगा लो जोर अब और कहीं.. जिसे खिलौने वाली गुड़िया समझ कर खेलते थे अब तक, वो जीती जागती नारी है।  नाज़ुक है लेकिन आग भी है स्त्री, जब खुद पर आ जाए तो आ ना जाए तेरी शामत कहीं। दया ,ममता और करुणा  की देवी है स्त्री, प्रेम और आदर की  पात्र है स्त्री। जीवन पर बराबरी का अधिकार  रखती है स्त्री।। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता

एक पड़ाव ek padaaw - hindi poem

  एक पड़ाव (हिंदी कविता) / Ek padaaw (hindi poem) ( इंसान की सबसे पुरानी और बड़ी गलतफहमी ये  है कि वो खुदको  सबसे अच्छा और बगैर कमी के व्यक्ति समझता है और ऐसे लोग इस घमंड में  दूसरों की कमी तो आसानी से देख लेते हैं और उसके लिए शोर भी मचाते हैं, बगैर सामने वाले के सही कारण जाने। लेकिन इस बीच उन्हें पता ही नहीं चलता कि लोगों की गलतियां या सौ कमियां दिखाते दिखाते खुद उन्होंने अपनी हजार कमियां जगजाहिर कर चुके होते हैं या हजार गलतियां कर लेते हैं। इसलिए हम सभी को बीच बीच में अपने जीवन की यात्रा में किसी छोटे से पड़ाव  में थोड़ी देर रुक कर आत्ममंथन कर आगे बढ़ने की मशविरा देती छोटी सी कविता प्रस्तुत है।) एक पड़ाव जब मन हो शांत निर्मल  तब सोचना निष्पक्ष होकर कुछ ख्याली खरपतवार उग आए हैं उद्विग्न होकर कटु शब्दों और लांछनों से सराबोर होकर जब चलोगे राह में उत्कंठा और पूर्वाग्रहों को लेकर मंजिल का तो पता नहीं.. साथी सभी खो जायेंगे, तुमसे मायूस होकर। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poe

जरूरी है Jaruri hai - Hindi poem

  जरूरी है... (हिंदी कविता)/ Jaruri hai (Hindi Poem) जरूरी है नवांकुर के लिए  धूप के साथ  नमी जरूरी है। बगिया के लिए फूलों के साथ कांटे जरूरी हैं। जिंदादिली के लिए हंसी के साथ आंसू जरूरी है। जिंदगी के लिए खुशी के साथ ग़म जरूरी है। रिश्तों के लिए बुनियाद के साथ प्यार जरूरी है। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) साथ तुम्हारे रहना था 2) फरेब 3) रिश्ते टूटे नहीं हैं 4) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 5) थोड़ा और की चाह

साथ तुम्हारे रहना था Sath tumhare rahna tha - Hindi poem

  साथ तुम्हारे रहना था (हिंदी कविता)/ Sath tumhare rahna tha (Hindi Poem) साथ तुम्हारे रहना था। साथ तुम्हारे रहना था, संग रहने के अरमान में ख़ामोश धीमी मौत को  गले लगा लिया मैंने। साथ तुम्हारे हंसना था, हंसने की चाह में दामन को आंसुओं से सजा लिया मैंने। और, एक वो हैं जो हर चोट देकर भी, अपने हाथ मेरे हाथों से  छुड़ाकर भी... ना चेहरे में शिकन कोई ना दिल में अफसोस लिए बड़े मासूम और अनजान बने मुस्कुराते हैं। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) एक फरेब 2) थोड़ा और की चाह 3) सीख रही हूं मैं 4) रिश्ते टूटे नहीं हैं 5) प्यार मोहब्बत इश्क़

एक फ़रेब Ek Fareb - Hindi poem

एक फ़रेब(हिंदी कविता)/ Ek Fareb(Hindi poem) एक फ़रेब अगर कोई तुमसे बच रहा हो तो परेशान ना हो। सोचो...अच्छा हुआ, तुम बच गए, एक फ़रेब से। । (:- तारा कुमारी) (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) रिश्ते टूटे नहीं हैं 2) प्यार मोहब्बत इश्क़ 3) मत भूलना 4) पढ़ लो 5) अगर वो नहीं तो क्या हुआ

रिश्ते टूटे नहीं हैं Rishte tute nahin hain - Hindi poem

  रिश्ते टूटे नहीं हैं (हिंदी कविता)/rishte tute nahin hain (Hindi poem) रिश्ते टूटे नहीं हैं.. उम्मीद नहीं कोई तुमसे अब शिकवा नहीं कोई तुमसे रिश्ते टूटे नहीं हैं ..अब भी। बस,उलझी हूं एक डोर से हां.. खामोशी ने चुपके से, दोस्ती कर ली है मुझसे।। ~~~ (: - तारा कुमारी) (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) प्यार मोहब्बत इश्क़ 2) मत भूलना 3)  पढ़ लो 4) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 5) क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो 6) थोड़ा और की चाह 7) वक़्त के सीने में 8) कविता की छटा 9) बहती नदी सी 10) रूठे बैठे हो क्यों

प्यार मोहब्बत इश्क़ pyaar mohabbat ishq - poem

प्यार, मोहब्बत,इश्क़ ( हिंदी कविता)/pyaar, mohabbat,ishq ( Hindi poem) प्यार,मोहब्बत,इश्क़  बड़े नादान हैं वो जो पूरी प्रेम कहानी की ख्वाहिश रखते हैं।  यहां तो.. प्यार, मोहब्बत,इश्क़ बेचारे एक-एक अक्षर  खुद ही अधूरे फिरते हैं। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) मत भूलना 2) पढ़ लो 3) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 4) क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो 5) थोड़ा और की चाह

मत भूलना Mat Bhulna - Hindi poem

 मत भूलना - हिंदी कविता/ Mat Bhulna (Hindi poem) मत भूलना.. कभी यह मत भूलना.. जब तुम रोते हो, तब मेरा दिल भी रोता है। आंसुओं का क्या है? कभी आंखों से बाहर तो कभी अंदर ही रह जाता है। :- (तारा कुमारी) (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) पढ़ लो 2) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 3) क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो 4) थोड़ा और की चाह 5) वक़्त के सीने में

पढ़ लो Padh lo - Hindi poem

पढ़ लो..(हिंदी कविता)/Padh lo..( Hindi poem) पढ़ लो..  (हिंदी कविता) शब्द  नहीं,  आज.. कुछ लिखने को। ~~~ पढ़ सको तो, पढ़ लो.. कोरे कागज को।। ~~~ (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 2) क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो 3) थोड़ा और की चाह 4) वक़्त के सीने में 5) कश्मकश

अगर वो नहीं तो क्या हुआ Agar wo nahin to kya huwa - Hindi poem

  अगर वो नहीं तो क्या हुआ( हिंदी कविता)/Agar wo nahin to kya huwa(Hindi Poem) (सदियों से प्यार को अलग अलग तरह से देखा समझा और महसूस किया जाता रहा है। उन्हीं में से एक एहसास को शब्दों में अभिव्यक्त करती ये छोटी सी कविता प्रस्तुत है।) अगर वो नहीं तो क्या हुआ.. तकदीर में हमारी  अगर वो नहीं तो क्या हुआ.. उनकी चाहतों में  हम बसते हैं।  उनके साथ चलना  मुमकिन नहीं तो क्या हुआ.. उनकी सांसों में  हम संग चलते हैं। इश्क की ये भी  इक इंतेहां है दोस्तों.. उनकी हरेक यादों में  सिर्फ, हम महकते हैं। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो 2) थोड़ा और की चाह 3) वक़्त के सीने में 4) कश्मकश 5) मेरी मुहब्बत इतनी खूबसूरत ना थी 6) कविता की छटा

क्या तुम भी ऐसे अपने ग़म छुपाते हो Kya tum bhi aise apne gham chhupate ho - Hindi poem

क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो! (हिंदी कविता)/ Kya tum bhi aise apne gham chhupate ho! (Hindi poem) (कहते हैं रोना कमज़ोरी की निशानी है, लोग दूसरों के सामने रोने से बचते हैं।लेकिन ये भी सच है कि रोना दिल के बोझ को कम करने का एक स्वाभाविक तरीका है।)  क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो! जब मन हो आहत  और राहत की हो चाहत तब सबके सामने चेहरे पर हंसी ओढ़कर चुपके से फिर छत के कोने में छुपकर जी भर कर रो लेते हो? क्या तुम भी ऐसे .. अपने गम छुपाते हो! किसी को ना देख आंखो में नीर दरिया बनकर मचल जाती है, और किसी के आने की आहट से  झटपट  रेगिस्तान बन जाती है। क्या तुम भी ऐसे.. अपने गम छुपाते हो! जब हृदय उदास होता है रूठा रूठा सा तन मन होता है, फिर भी अभिनय में सबको मात देकर खुदको मस्त मौला दिखाते हो? क्या तुम भी ऐसे.. अपने गम छुपाते हो! कभी जब आंसू को ना मिले बह जाने की पसंदीदा जगह तो चुपचाप जद्दोजहद से नमी को पीकर मुस्कुरा जाते हो? क्या तुम भी ऐसे.. अपने गम छुपाते हो! (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक

थोड़ा और की चाह Thoda aur ki chah - Hindi poem

थोड़ा और की चाह ( हिंदी कविता)/ Thoda aur ki chah(Hindi Poem) ( कभी कभी हम उन खुशियों को नहीं देख पाते या उनकी कद्र नहीं करते जो हमारे आस पास  होती हैं।हमें ज्यादा की चाह इतनी हो जाती है कि कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते हैं चाहे वो रास्ता गलत ही क्यूं ना हो, जो बाद में हमें सिर्फ बदले में दुख देती है। जीवन में सुख दुख आते रहते हैं। हमें उनका समान रूप से स्वागत करना चाहिए और अडिग होकर अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।जो कमजोर हो जाते हैं वो सब कुछ खो देते हैं।) इन्हीं भावनाओं को उकेरती ये कविता प्रस्तुत है:-   थोड़ा और की चाह थोड़ा और की चाह में  जो पास है वो मत गवाना, अथाह खुशियों की चाह में कहीं गमों को ना समेट लेना। छोटी छोटी खुशियां भी जिंदगी में रंग भर देती हैं, थोड़ा और की जिद, इसमें कड़वाहट घोल देती है। जैसे दिन के बाद रात आती है खुशियां भी अपना रंग बदलती है, कभी उदासी कभी आंसू बनकर जीवन के रंगमंच में भूमिका निभाती है। थोड़ा सब्र कर जिंदगी के टेढ़े मोड़ पर कर ले हर पल की तू  बंदगी, तपकर तू बनेगा एक दिन सोना विकल होकर खुदको मत खोना। रास्ते में नहीं बिछे होंगे फूल सदा कांटे भी मिलेंगे

वक़्त के सीने में Waqt ke seene mein

  वक़्त के सीने में (हिंदी कविता)/Waqt ke seene mein (Hindi poem) (कालचक्र ने हमेशा ही संसार को नये नये दौर दिखाए हैं। इन परिस्थितियों में हम सब को हमेशा ही मिलकर भाई चारे का भाव लिए कठिन समय का सामना करने की आवश्यकता रही है।चाहे वह कोई प्राकृतिक आपदा हो या युद्ध जैसे विनाशकारी संकट हो।आज हम जिस समसामयिक संकट से जूझ रहे हैं उससे ओतप्रोत छोटी सी कविता प्रस्तुत है:-) वक़्त के सीने में हम बांधते हैं वक़्त को एक पैमाने में कभी साल कभी दिन कभी महीने में कई दौर गुजर जाते हैं वक़्त के सीने में हम उलझे रहते हैं जन्म-मृत्यु के ज़ीने में नहीं मज़ा  है बेमतलब सुख चैन खोने में क्यूं इंसान खुश नहीं है एक साथ होने में दिन रात बिता देते है दूसरों को तौलने में खुद भले ही हों बदनाम  पूरे महकमे में दुनिया को दिखाया है भविष्य,वक़्त ने आइने में खड़ा है तू विकराल मुंह खोले मौत के दरवाजे में कुछ ही फासला होता है जान गवाने में अरसे निकल जाते हैं गुजर बसर जुटाने में जान हलक में रख बीती है 2020 कोविद-19 में दो हजार इक्कीस थोड़ी मिसरी घोल जाए जीवन में आओ जगा कर प्रेम भाव अपने मन के कोने में  लग जायें हम सब प्रक

कश्मकश kashmakash - Hindi poem

कश्मकश / Kashmakash - हिंदी कविता(Hindi poem) (जिनके बारे हमें लगता है कि वो हमारा दर्द नहीं समझ सकते, हम उन्हें नजरअंदाज करते हैं। लेकिन हो सकता है वो उसी दर्द से गुजर रहे हों और उन्होंने कभी जताया ना हो।ऐसे में जब हम उन्हें ' तुम नहीं समझोगे ' जैसी बातें  कहकर और दर्द दे जाते हैं तो वो चुपचाप सहना ही बेहतर मान लेते हैं। और हमें इस बात का एहसास तक नहीं हो पाता।) क्या आपने ऐसे परिस्थितियों का कभी सामना किया है?कुछ ऐसे ही आंतरिक संघर्षों और भावनाओं से ओतप्रोत ये छोटी सी कविता आपके समक्ष प्रस्तुत है:- कश्मकश एक कश्मकश इधर है  एक कश्मकश उधर है। उसने तो अपने टूटते घरौंदे  दिखा दिए हम ना दिखा सके अपना टूटता हुआ वजूद। जमाने के मखौल से छिपा रखा है अब तक वरना घरौंदा तो टूटा हुआ हमारा भी है। और वो सोचते हैं कि हमें अंदाजा ही नहीं  घरौंदे के टूटने की कसक.. बरसों जिन हालातों को जीती आयी हूं उन्हीं में से चंद रोज गुजर कर वो हमें ही नासमझ और खुशनसीब कहते हैं। जिस दर्द में डूबी कश्ती का आईना हैं हम उसी पर सवार होकर नये सफर के अनुभव हमसे बांटते हैं वो। कहते है तुझे पता ही नहीं, इसलिए तुम समझत

मेरी मुहब्बत इतनी खूबसूरत ना थी Meri muhabbat itni khubsurat na thi - Hindi poem

  मेरी मुहब्बत इतनी खूबसूरत ना थी (हिंदी कविता)  Meri muhabbat itni khubsurat na thi - Hindi poem कहते हैं.. मुहब्बत दुनिया की सबसे खूबसूरत तोहफ़ा है।कोई कहता है .. मुहब्बत आग का दरिया है।किसी के लिए  हसीन दुनिया तो किसी के लिए बर्बादी का रास्ता।जितने लोग उतनी ही बातें उतने ही अनुभव। लेकिन जितनी भी बातें कर ले जमाने भर में लोग.. इस मुहब्बत के बिना बात पूरी होती ही नहीं।मुहब्बत के कई रंगों में से एक रंग को बयां करती चंद लाइनें आपके समक्ष प्रस्तुत है:- मेरी मुहब्बत इतनी खूबसूरत ना थी। मुझे नहीं आता था  दर्द सहना दौड़ी चली आती थी तुम्हारे पास मुझे नहीं आता था चोट छुपाना दिखा दिया करती थी हर उदासी प्यार के दो बोल और साथ हो हर पल इस एहसास को पाने की जिद करती थी और इस जिद में कई गलतियां  कर जाती थी.. मुझे पता है - मेरी मुहब्बत इतनी खूबसूरत ना थी, इसलिए तुमने दूरी बना ली मुझसे। दूसरों के लिए तुम्हारा वक़्त देना और मेरे लिए मजबूरियां गिनाना कतई ना भाता था मुझे रूठ के कर बैठती थी शिकायतें मनाने के बजाय बेरुखी दिखाते थे तुम मुझे नहीं आता था इसे बर्दाश्त करना बोल जाती थी  बुरा भला मैं तुम्हें.. म

कविता की छटा kavita ki chhata - Hindi poem

कविता की छटा (हिंदी कविता) kavita ki chhata (Hindi poem)   कविता क्या है?  इसका उत्तर सीमित नहीं हो सकता।यह वो रोशनी है जिसकी चमक अलग अलग रूपों में हम तक पहुंचती है।इसकी छटा को चंद शब्दों में कविता के रूप में ही  उकेरने की छोटी सी कोशिश करते हुए ये कविता आपके समक्ष प्रस्तुत है :- कविता की छटा - Hindi poem  मन के भावों को जो पंख दे दे    वो सशक्त अभिव्यक्ति की दुनिया है कविता। शब्दों की खूबसूरत धागे में गुंथी एक सुगंधित हार है कविता। खूबसूरत फूलों के बागों में परियों की कहानी है कविता। सूरज की खिलती धूप में नहाती चांद की चांदनी बनकर खिलखिलाती, मूक अमूक सब की भाषा बनकर शब्दों से जीवंत दृश्यों का सृजन करती है कविता। कवि की सतरंगी कल्पना बन कर कल्पना के विहंगम सैर कराती है कविता। कविता कभी सुकोमल, कभी मनभावन, कभी कवि के सुख - दुख को, कभी जनमानस के मर्म को ऊकेरती.. हृदय को है ये झकझोरती। प्रेम, दुख, क्रोध,वीरता और कभी प्रतिकार की संदेशा है कविता। कभी छंद कभी मुक्तक कभी दोहा बन कई विधाओं में, मन को शीतल करती है कविता। कभी वीर रस, कभी ओज रस में डुबकी लगाकर सम्पूर्ण समाज को राह दिखाती है कविता

वो तुम थे और मैं थी wo tum the aur main thi - Hindi poem

वो तुम थे और मैं थी। (हिंदी कविता) / Wo tum the aur main thi. (Hindi poem) ( मन के कुछ कोमल भावनाएं हमारे हृदय में इतनी गहरी बस जाती हैं कि जिंदगी के हर मोड़ पर हमारे साथ साथ चलती हैं। वक़्त बदल जाता है,लोग बदल जाते हैं और हम  चाहकर भी ना उनसे मुंह मोड़ पाते हैं ना भुला पाते हैं।बस कहीं किसी कोने में उन यादों को उम्रभर अपने सीने में संजोए रख लेते हैं।) वो तुम थे और मैं थी  पल पल मुझे याद करना बातें करने के बहाने तलाशना तुम भूल गए वो दिन! वो तुम थे और मैं थी.. मेरी धड़कनों में बसे हैं, अब भी वो दिन। मीठी मीठी बातों के मेले में खो जाना और सड़कों पर लंबे सफर पर निकल जाना तुम भूल गए वो दिन! वो तुम थे और मैं थी.. मेरी धड़कनों में बसे हैं, अब भी वो दिन। मुझे देखते ही गालों पर खुशी की लालिमा छा जाना तेरी पूरी दुनिया का सिर्फ मेरे ही इर्द गिर्द सिमट जाना तुम भूल गए वो दिन! वो तुम थे और मैं थी.. मेरी धड़कनों में बसे हैं, अब भी वो दिन। कहीं खो गए अब वो सारे लम्हें पास होकर भी कहीं गुम हो तुम  हुक सी उठती है सीने में, अजनबी नजरों से जब मुझे देखते हो तुम। मुझे अब भी याद आते हो तुम... हां, मुझे अब