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माफ़ कर देना Maaf kar dena - Hindi poem

  माफ़ कर देना ( हिंदी कविता) / Maaf kar dena ( hindi poem) माफ़ कर देना माफ़ कर देना बनी मैं तेरी परेशानियां, माफ़ कर जाना हुई मुझसे नादानियां। मान लिया तुझको मैंने अपनी सारी दुनिया, मांग लिया तुझसे सारे जहां की खुशियां। माफ़ कर देना बनी मैं तेरी परेशानियां, माफ़ कर जाना हुई मुझसे नादानियां। माना हो गई मुझसे सौ गलतियां, दो दिन की जुदाई भी लगी सदियां। माफ़ कर देना बनी मैं तेरी परेशानियां, माफ़ कर जाना हुई मुझसे नादानियां। काटने लगी थीं तेरी बेरुखी और दूरियां  समझ न पाई मैं दिवानी, तेरी मजबूरियां। माफ़ कर देना बनी मैं तेरी परेशानियां माफ़ कर जाना हुई मुझसे नादानियां। मिट जाती तेरे राहत भरे दो बोल से तन्हाईयां, मेरे दिल की थी बस यही छोटी- छोटी कहानियां। माफ़ कर देना बनी मैं तेरी परेशानियां, माफ़ कर जाना हुई मुझसे नादानियां। नहीं है दिल जीतने की मुझमें खूबियां हिस्से में आती हैं मेरे अक्सर ही तल्खियां! माफ कर देना, बनी मैं तेरी परेशानियां माफ कर जाना हुई मुझसे नादानियां। (स्वरचित) :- तारा कुमारी ( कैसी लगी आपको यह गीत/कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके स
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क्या जिक्र करूं मैं kya zikar karun main - Hindi poem

  क्या जिक्र करूं मैं ( हिंदी कविता) / kya zikar karun main (Hindi poem) क्या जिक्र करूं मैं क्या जिक्र करूं मैं अपनी मुहब्बत का जिस मुहब्बत को मुझसे मुहब्बत ही नहीं! दिन - रात कसक में घुलता है मन मेरा  तमाम दुनियादारी की फिक्र है उसे, जरूरी और जरूरत की लंबी फेहरिस्त में  बस एक मैं ही हूं, जो जरूरी नहीं। क्या जिक्र करूं मैं अपनी मुहब्बत का जिस मुहब्बत को मुझसे मुहब्बत ही नहीं।। ख्वाब तो देखे बहुत-सी मुहब्बत को लेकर  पर किए ख्वाहिशों से ज्यादा समझौता मैंने। इस मुहब्बत के सौदेबाजी में भी, दो पल राहत के मेरे नसीब में नहीं। क्या जिक्र करूं मैं अपनी मुहब्बत का जिस मुहब्बत को मुझसे मुहब्बत ही नहीं।। खुशी और गम सब राब्ता है मेरे उनसे, उनकी हर गली का रास्ता है जुदा मुझसे, उम्मीदों की नाव खेती, राह ताकती उनकी  लेकिन.. सबसे वास्ता है उनका,बस एक मुझसे ही नहीं। क्या जिक्र करूं मैं अपनी मुहब्बत का जिस मुहब्बत को मुझसे मुहब्बत ही नहीं।। नहीं कर सकती बयां शब्दों से क्या दिल पर मेरे गुजरती है, जब उनकी बेरुखी शूल की तरह चुभती है, आंखों से रिसते हैं वो जख्मों के लावा हैं,आंसू नहीं। पिघला दे जो पत्थर को

बेवजह Bewajah - Hindi poem

बेवजह / Bewajah - हिंदी कविता/ hindi poem बेवजह  कभी हो जाती है  बेवजह ही   जिंदगी गुलजार ! कभी सौ वजह भी  मुस्कुराने के लिए   लगती है बेज़ार !! (स्वरचित) :- तारा कुमारी ( कैसी लगी आपको यह छोटी सी कविता? जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) मुझे कोई मनाए 2) आहिस्ता आहिस्ता 3) दिल मासूम होता है 4) कहते थे साथ ना छोड़ेंगे हम 5) दिल मेरा यूं छलनी हुआ 5) वक़्त और त्रासदी 6) बहती नदी - सी 7) मुड़कर ना देखना अब पीछे कभी 8) बे सिर पैर की ख्वाहिशें 9) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता 10) एक पड़ाव

मुझे कोई मनाए Mujhe koi manaye - A Hindi poem

  मुझे कोई मनाए( हिंदी - कविता) / Mujhe koi manaye (Hindi - poem) ( बच्चों में बालसुलभ प्रवृति होती है - रूठना, फिर मान जाना। लेकिन जीवन के हर उम्र और पड़ाव में  हम रूठें और कोई हमें हर बार मना ले, ऐसा कम ही होता है। हम जीवन के कई सवालों  और  जवाबों के बीच उलझते हैं और सुलझते हैं। इन्हीं भावों से ओतप्रोत ये कविता आपके समक्ष प्रस्तुत है।) मुझे कोई मनाए/Mujhe koi manaye -  Hindi poem माथे पर छोटी - सी परवाह की एक लकीर लिए कांधे पर धीमें से अपनेपन का स्पर्श कर, गालों से फिसलते आंसू पोंछ - गले लगाए  ख्वाहिश थी रूठने पर मुझे कोई मनाए। नाराजगी में मैं अगर ताव भी दिखाऊं झूठ मूठ के गुस्से में झटक कर दूर हो जाऊं तब भी मुस्कुरा कर वो मेरे और पास आए खवाहिश थी रूठने पर मुझे कोई मनाए। ना हो जरूरत मुझे किन्हीं शब्दों की और बयां हो जाए कहानी...  नम आंखों से मेरे अरमानों की। कुछ इस तरह दुलार की बौछार हो जाए ख्वाहिश थी रूठने पर मुझे कोई मनाए। पर ये क्या बात हुई! चाशनी में डूबे शहर में मेरी रुसवाई हुई। संगदिल जमाने में,मेरे चंद तजुर्बों में बस एक ये ही नहीं था मेरी झोली में - रूठना छोड़ दो..  ना करो तुम

आहिस्ता - आहिस्ता Aahista - aahista - A Hindi poem

  आहिस्ता - आहिस्ता( हिंदी कविता) / Aahista - aahista ( Hindi poem) रिश्तों की खींचा तानी, भावनाओं के उठते गिरते लहरों के बीच थपेड़ों को सहते हुए जिंदगी में हम बहुत कुछ सीखते हैं,कुछ खोते हैं, कुछ पाते हैं।कुछ उम्मीदों से परे... तो कुछ सपनों से परे। यही जिंदगी है। आहिस्ता - आहिस्ता ( हिंदी कविता) चमकते चांद को आंगन में देख कुछ यूं उतावली हो गई बरसों घर में जलते दीये और बाती में जालसाजी हो गई। ना जाने कब, रौशनी की  उज्ज्वल चादर आहिस्ता आहिस्ता स्याह हो गई।। स्वार्थ और लालच में रिश्तों के बीज खोखली हो गई असली नकली चेहरों के बाज़ार में सच काली हो गई। ना जाने कब, विश्वास की निर्मल चादर आहिस्ता आहिस्ता मैली हो गई।। जगमगाते कागजी सितारे तूफान में भीग कर फीके हो गए जो ओझल थे कहीं धूल में,वो धुल कर मोती हो गए। ना जाने कब, ख्वाहिशों की रंगीन चादर आहिस्ता आहिस्ता बदरंग हो गई।। जिंदगी के सबक सीखते-सीखते खुद एक सबक बन गए लगते थे कभी सबको सही,अब बस भूल बन कर रह गए। ना जाने कब, अपनेपन की मुलायम चादर आहिस्ता आहिस्ता सख्त हो गई।। (स्वरचित) :- तारा कुमारी ( कैसी लगी आपको यह गीत/कविता?जरूर बताएं। यदि पस

दिल मासूम होता है Dil masoom hota hai - Hindi poem

 दिल मासूम होता है ( हिंदी कविता) / Dil masoom hota hai ( Hindi poem) दिल  मासूम होता है इश्क़ करनेवाला दिल मासूम होता है, मासूमियत खो जाए जहां वहां इश्क कहां होता है। झूठ और फरेब से दूर 'सच्चा- रिश्ता' होता है, शक और नफरत का बीज पनपे जहां वहां भरोसा कहां होता है। दोनों तरफ हो नेह तो जिंदगी खुशनुमा होता है, एकतरफा हो जज़्बात की परवाह  जहां वहां सुकून कहां होता है। प्यार में तो सब कुछ न्योछावर हो जाता है, कसरत करने लगे दिमाग जहां वहां प्रेम कहां होता है। (स्वरचित) :- तारा कुमारी ( कैसी लगी आपको यह गीत/कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) कहते थे साथ ना छोड़ेंगे हम 2) दिल मेरा यूं छलनी हुआ 3) सपनें 4)  भावनाएं,सपने और हकीकत 5) वक़्त और त्रासदी 6) बहती नदी - सी 7) मुड़कर ना देखना अब पीछे कभी 8) बे सिर पैर की ख्वाहिशें 9) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता 10) एक पड़ाव

गर्मी,छाया,हवा पर कविता kah mukri kavya vidha - hindi poem

गर्मी,छाया,हवा पर कविता। ( काव्य विधा - कह मुकरी  ) (काव्य विधा - कह मुकरी) गर्मी,छाया,हवा पर कविता - hindi poem भोर होते ही तपने लगता जैसे रात की आग हो सुलगता देखो तो इसकी बेशर्मी! कौन सखि साजन? ना सखि गर्मी। बाहर निकलो घर से, तो लहर जाता बन्द कमरे में जैसे सब ठहर जाता चलो मिली तो थोड़ी नरमी कौन सखि साजन? ना सखि गर्मी। जब भी वो पास आए  पसीने से तन भीग जाए तरसा दे ठंडी हवा के लिए जुल्मी  कौन सखि साजन? ना सखि गर्मी। लस्सी,मिल्क शेक,आम का पन्ना खूब पिलाता सुबह शाम बन्ना पर फिर भी लगता वो बैरी कौन सखि साजन? ना सखि गर्मी। जब हो खूब घने पेड़ के नीचे  सूरज ना दिखता उसके पीछे संग अपने ठंडी हवा लाता वो साया कौन सखि साजन? ना सखि छाया। चांदनी रात में बिछा हो खटिया और समय के रथ से गुम हो जाए पहिया तब हौले से दबे पांव मुझे छूकर भागे मुवा कौन सखि साजन?ना सखि ठंडी मंद हवा। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) बहती नदी - सी 1) मुड़कर ना देखना अब पीछे कभी 2) बे सिर पैर

मुड़ कर ना देखना अब पीछे कभी mudkar na dekhna ab pichhe kabhi - Hindi poem

मुड़ कर ना देखना अब पीछे कभी - हिंदी कविता / Mudkar na dekhna ab pichhe kabhi - Hindi poem (आगे बढ़ो - move on... आसानी से लोग ये शब्द कह जाते हैं लेकिन चाहे कोई भी परिस्थिति क्यूं ना हो ,उससे निकल कर आगे बढ़ना आसान कभी नहीं होता।एक कदम आगे बढ़ाओ तो चार कदम कई कारणों, भावनाओं ,परिस्थितियों के दबाव में पीछे की ओर वापस खींच जाते हैं।लेकिन जब वजह हमारे और सबके भले की बात हो ,आत्म - सम्मान की बात हो तो बेशक आगे बढ़ना ही बेहतर होता है।) मुड़ कर ना देखना अब पीछे कभी जो ना देख सके तुम्हारे आंखों में नमी क्यूं खलना,जीवन में उसकी कमी! जब वो है ही नहीं, ना आसमा ना तेरी जमीं। मुड़ कर ना देखना अब पीछे कभी।। सह लिया तुमने कई हृदय आघात मन को मिली है सिर्फ कुठाराघात नहीं है ये जीने का सलीका। मुड़ कर ना देखना अब पीछे कभी।। प्रेम को चुन कर खो दिया है तुमने खुदको  समेट कर आत्म - सम्मान को अब आंचल में खुद की बन जा और चल निकल बाकी के सफर में। हां..मुड़ कर ना देखना अब पीछे कभी जो ना देख सके तुम्हारे आंखों में नमी क्यूं खलना,जीवन में उसकी कमी! जब वो है ही नहीं, ना आसमा ना तेरी जमीं।। (स्वरचित) :- तारा कुमार

ना जाने क्या है ये Na jaane Kya hai ye - Hindi Poem

 ना जाने क्या है ये - हिंदी कविता / Na jaane Kya hai ye - Hindi Poem (जीवन है तो जीवन के हर रंग होंगे ही,हम चाह कर भी इनसे बच नहीं सकते।लेकिन कभी कभी उलझनें हमें इस कदर  अप्रत्याशित पलों को सामने रख देती है जो हमें उदास कर देती है। कुछ देर के लिए हम हतप्रभ से परिस्थितियों को सिर्फ देखते रह जाते हैं।) इन्हीं भावनाओं को ओढ़े ये छोटी सी कविता प्रस्तुत है:- ना जाने क्या है ये आज मन क्यूं भारी सा है, कहीं कुछ खाली खाली सा है।   दिल के कमरे में उदासी सी है अंखियों के झरोखों में नमी सी है। चुपके से पड़ी कोई दरार सी है घुटी सिमटी एक खामोशी सी है। यादों की धुंधली परत बिखरी सी है कहीं किसी की चुप्पी चुभती सी है। रह रह कर कुछ कचोटता सा है, उम्मीदों का दीया बुझता सा है। कहीं कभी कोई शब्द झकझोरती है, तो कभी, अंधियारे में रोशनी की तलाश सी है । ना जाने क्या है ये... जीवन के अप्रत्याशित यात्रा में कई उलझनें, झूलती सवाल सी है। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) होली की

बे सिर पैर की ख्वाहिशें be sir pair ki khawahishen - Hindi poem

बे सिर पैर की ख्वाहिशें - हिंदी कविता/ Be sir pair ki khawahishen - Hindi poem. बे सिर पैर की ख्वाहिशें बस इतनी सी थी आरजू , मुझे जब दर्द हो... आपके दिल में दस्तक हो।   अगर रूठ जाऊं मैं, जमीं आसमां एक कर दे वो.. रिश्ते में कुछ ऐसी बात हो।  मेरे उल्टे सीधे अल्फाजों में भी,   बेइंतेहा प्यार ढूंढ़ ले जो..  ऐसी नज़रें मुझे इनायत हो।  नाज़ नखरे और झगड़ों के बीच बारी जब साथ देने की आए..  तो दोनों ओर से उल्फत हो। आए थे जमाने में जुदा-जुदा लेकिन जब जाने की बात हो.. हम  रुखसत साथ - साथ हों। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) होली की खुमारी 2) खामोशियों में लिपटी चाहतें 3) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता 4) एक पड़ाव 5) फरेब 6) रिश्ते टूटे नहीं हैं 7) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 8) थोड़ा और की चाह 9) जरूरी है 10) बेटियां

होली की ख़ुमारी Holi ki Khumaari - Hindi poem

 होली की खुमारी - हिंदी कविता/ Holi ki khumaari - Hindi poem  इस वर्ष हम सब कोविड -19 के प्रकोप के साथ होली का त्यौहार मनाने के लिए बाध्य हैं। त्यौहार हमारे लिए जितना खास महत्व रखता है उतना ही जरूरी हमारी सुरक्षा भी है जिसे हम अनदेखा नहीं कर सकते। सावधानियों के साथ त्यौहार की खुशियों और एहसास को महसूस करने की मशविरा देती हुई ये छोटी सी कविता प्रस्तुत है:- होली की खुमारी  मन में है होली की खुमारी, पर भूल ना जाना सामाजिक दूरी। नासपीटे कॉरोना ने त्यौहार में खलल है डाली, प्रक्षालक और नासिकामुखसंरक्षक कीटाणुरोधी वायुछानक वस्त्र डोरी युक्त पट्टिका ने खतरे को है टाली। राग, द्वेष और बैर को गुलाल संग हवा में उड़ा कर, प्रेम ,स्नेह और अपनेपन की खुशबू चौतरफा महका कर। दुख व कटु अनुभवों को रंगों में धोकर भाईचारे का संदेश हृदय में प्रस्फुटित कर। नई उमंग और खुशियों को गले लगाना है, मिलकर..पैर पसारती कोरोना को दूर भगाना है । माना,मन में है होली की खुमारी पर अपनी सुरक्षा भी है बहुत जरूरी। दो गज की रहे दूरी,पर रहे ना दिलों में दूरी कर लो ऐसे ही.. मन के भावों को पूरी। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (1)प्रक्षालक

खामोशियों में लिपटी चाहतें khamoshiyon mein lipti chaahten - Hindi poem

 खामोशियों में लिपटी चाहतें - हिंदी कविता / khamoshiyon mein lipti chaahten - Hindi poem (कहते हैं, जब किसी से हम प्यार करने लगते हैं या करते हैं तो उनकी हर भावनाओं को बिना कहे समझते हैं या महसूस कर लेते हैं।लेकिन  जब कभी हम अपनी उम्मीदों को ही सिर्फ सर्वोपरि देखने लगते हैं तब परिस्थितियां उलझ जाती हैं। सामने वाले के हसरतों और उम्मीदों को समान महत्व ना देने से उनके लिए सब कुछ कितना कठिन हो जाता है हम समझ ही नहीं पाते। इन्हीं भावनाओं से लिपटी ये छोटी सी कविता प्रस्तुत है:- ) खामोशियों में लिपटी चाहतें दिल में मचलते हैं.. कई छोटी - छोटी बातें और ख्वाहिशें.. लेकिन जब भी  सूक्ष्म भावों को उनसे बांटने की  सोचता ये मन उनकी ही बातों का  रेला चल पड़ता। और ये नन्हा दिल बस मुस्कुरा कर कारवां में साथ हो लेता। उनकी हंसी के संग मैं भी चहक लेती। नमी जब उनकी  आंखों में दिखती, तो अपनेपन की  गरमाहट से  सफर की थकान  कम कर देती। कोई  मोड़ तीखा मिलता तो कसकर हाथ थाम लेती। और मुश्किलों को उनकी आधा - आधा बांट लेती। पर जब होता मेरा सामना.. दबी छुपी कुछ  मेरे अरमानों से.. वो कहीं साथ दिखते नहीं, मेरे जज्बातों

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता mahila diwas par kavita - Hindi Poem

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता(हिंदी कविता)/ Antarashtreey Mahila diwas(hindi poem) / Poem on women's day. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता(  International women's day) तोड़ लो मुझे चाहे जितना निरीह प्राणी जानकर, लांछन लगा लो चाहे जितना अबला स्त्री मानकर। जब हाथ ना लगा सके तो, अंतर्मन की दृढ़ता पर प्रहार कर शीश झुकाने की  कर लो कोशिशें चाहे जितनी। चोट खाकर हीरे-सी कठोर रूप धर चुकी हूं मैं, पहले से और भी खूबसूरत हो चुकी हूं मैं। फ़र्क करना सिखा दिया है वक़्त और जमाने ने, किस बात को हृदय से लगाना है किसे दूर से ही इंकार कर देना है। अब ना चलेगा कोई छल तुम्हारा मेरी सरल भावनाओं पर, ना होंगी आहत अब मेरा कोमल मन विषैले, मिथ्या दंभ और कटु वचनों से। लगा लो जोर अब और कहीं.. जिसे खिलौने वाली गुड़िया समझ कर खेलते थे अब तक, वो जीती जागती नारी है।  नाज़ुक है लेकिन आग भी है स्त्री, जब खुद पर आ जाए तो आ ना जाए तेरी शामत कहीं। दया ,ममता और करुणा  की देवी है स्त्री, प्रेम और आदर की  पात्र है स्त्री। जीवन पर बराबरी का अधिकार  रखती है स्त्री।। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता

एक पड़ाव ek padaaw - hindi poem

  एक पड़ाव (हिंदी कविता) / Ek padaaw (hindi poem) ( इंसान की सबसे पुरानी और बड़ी गलतफहमी ये  है कि वो खुदको  सबसे अच्छा और बगैर कमी के व्यक्ति समझता है और ऐसे लोग इस घमंड में  दूसरों की कमी तो आसानी से देख लेते हैं और उसके लिए शोर भी मचाते हैं, बगैर सामने वाले के सही कारण जाने। लेकिन इस बीच उन्हें पता ही नहीं चलता कि लोगों की गलतियां या सौ कमियां दिखाते दिखाते खुद उन्होंने अपनी हजार कमियां जगजाहिर कर चुके होते हैं या हजार गलतियां कर लेते हैं। इसलिए हम सभी को बीच बीच में अपने जीवन की यात्रा में किसी छोटे से पड़ाव  में थोड़ी देर रुक कर आत्ममंथन कर आगे बढ़ने की मशविरा देती छोटी सी कविता प्रस्तुत है।) एक पड़ाव जब मन हो शांत निर्मल  तब सोचना निष्पक्ष होकर कुछ ख्याली खरपतवार उग आए हैं उद्विग्न होकर कटु शब्दों और लांछनों से सराबोर होकर जब चलोगे राह में उत्कंठा और पूर्वाग्रहों को लेकर मंजिल का तो पता नहीं.. साथी सभी खो जायेंगे, तुमसे मायूस होकर। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poe

जरूरी है Jaruri hai - Hindi poem

  जरूरी है... (हिंदी कविता)/ Jaruri hai (Hindi Poem) जरूरी है नवांकुर के लिए  धूप के साथ  नमी जरूरी है। बगिया के लिए फूलों के साथ कांटे जरूरी हैं। जिंदादिली के लिए हंसी के साथ आंसू जरूरी है। जिंदगी के लिए खुशी के साथ ग़म जरूरी है। रिश्तों के लिए बुनियाद के साथ प्यार जरूरी है। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) साथ तुम्हारे रहना था 2) फरेब 3) रिश्ते टूटे नहीं हैं 4) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 5) थोड़ा और की चाह

साथ तुम्हारे रहना था Sath tumhare rahna tha - Hindi poem

  साथ तुम्हारे रहना था (हिंदी कविता)/ Sath tumhare rahna tha (Hindi Poem) साथ तुम्हारे रहना था। साथ तुम्हारे रहना था, संग रहने के अरमान में ख़ामोश धीमी मौत को  गले लगा लिया मैंने। साथ तुम्हारे हंसना था, हंसने की चाह में दामन को आंसुओं से सजा लिया मैंने। और, वो तुम थे, जो हर चोट देकर भी, अपने हाथ मेरे हाथों से  छुड़ाकर भी... ना चेहरे में शिकन कोई, ना दिल में अफ़सोस कोई लिए बड़े मासूम और अनजान बने  आज भी मुस्कुरातेे हो। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) एक फरेब 2) थोड़ा और की चाह 3) सीख रही हूं मैं 4) रिश्ते टूटे नहीं हैं 5) प्यार मोहब्बत इश्क़

एक फ़रेब Ek Fareb - Hindi poem

एक फ़रेब(हिंदी कविता)/ Ek Fareb(Hindi poem) एक फ़रेब अगर कोई तुमसे बच रहा हो तो परेशान ना हो। सोचो...अच्छा हुआ, तुम बच गए, एक फ़रेब से। । (:- तारा कुमारी) (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) रिश्ते टूटे नहीं हैं 2) प्यार मोहब्बत इश्क़ 3) मत भूलना 4) पढ़ लो 5) अगर वो नहीं तो क्या हुआ

रिश्ते टूटे नहीं हैं Rishte tute nahin hain - Hindi poem

  रिश्ते टूटे नहीं हैं (हिंदी कविता)/rishte tute nahin hain (Hindi poem) रिश्ते टूटे नहीं हैं.. उम्मीद नहीं कोई तुमसे अब शिकवा नहीं कोई तुमसे रिश्ते टूटे नहीं हैं ..अब भी। बस,उलझी हूं एक डोर से हां.. खामोशी ने चुपके से, दोस्ती कर ली है मुझसे।। ~~~ (: - तारा कुमारी) (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) प्यार मोहब्बत इश्क़ 2) मत भूलना 3)  पढ़ लो 4) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 5) क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो 6) थोड़ा और की चाह 7) वक़्त के सीने में 8) कविता की छटा 9) बहती नदी सी 10) रूठे बैठे हो क्यों

प्यार मोहब्बत इश्क़ pyaar mohabbat ishq - poem

प्यार, मोहब्बत,इश्क़ ( हिंदी कविता)/pyaar, mohabbat,ishq ( Hindi poem) प्यार,मोहब्बत,इश्क़  बड़े नादान हैं वो जो पूरी प्रेम कहानी की ख्वाहिश रखते हैं।  यहां तो.. प्यार, मोहब्बत,इश्क़ बेचारे एक-एक अक्षर  खुद ही अधूरे फिरते हैं। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) मत भूलना 2) पढ़ लो 3) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 4) क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो 5) थोड़ा और की चाह

मत भूलना Mat Bhulna - Hindi poem

 मत भूलना - हिंदी कविता/ Mat Bhulna (Hindi poem) मत भूलना.. कभी यह मत भूलना.. जब तुम रोते हो, तब मेरा दिल भी रोता है। आंसुओं का क्या है? कभी आंखों से बाहर तो कभी अंदर ही रह जाता है। :- (तारा कुमारी) (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) पढ़ लो 2) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 3) क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो 4) थोड़ा और की चाह 5) वक़्त के सीने में