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बेवजह Bewajah - Hindi poem


बेवजह / Bewajah - हिंदी कविता/ hindi poem

bewajah

बेवजह

 कभी हो जाती है

 बेवजह ही

  जिंदगी गुलजार !

कभी सौ वजह भी

 मुस्कुराने के लिए

  लगती है बेज़ार !!

(स्वरचित)
:- तारा कुमारी

( कैसी लगी आपको यह छोटी सी कविता? जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।)


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