इश्क की मुट्ठी में Ishq ki mutthi mein - poetry in hindi

 Poetry in hindi (कविताओं का संकलन)

इश्क की मुट्ठी में (हिंदी कविता)/ Ishq ki mutthi mein (Hindi poem)


बिहार (गोपालगंज) से परवेज़ आलम की कविता 


कहने   वाले   तो  कहने  को  क्या क्या कहते हैं 

हम आसमानों में और हमारे पैर जमी पे रहते हैं ।


बुलंद होना और बुलंदियों का मयार कायम रखना 

रास्ते   बन   के  पड़े  किसी   की  छड़ी  रहते  हैं । 


हमारा काम था ये कि सब को सच बताया का जाए 

वरना  यहां  तो  सब  के  हाथ  हथकड़ी में रहते हैं ।


हमीं से सब मंसूफ हैं मुकदमा , अदालत और हाकिम

सब   कानून   दबे  दबे  हमारी  जूती  के  रहते हैं l


तू   अमीर  है  तो   अपनी   अमीरी  का   सबूत  दे 

तेरे   इर्द  गिर्द  के   लोग   फाकाकशी  में  रहते  हैं ।


सात   फेरों    के    बाद   भी  वो  अपने नहीं बनते

वो   जो   किसी    इश्क   की   मुट्ठी  में  रहते   हैं !

    (स्वरचित)
:-  परवेज़ आलम
    गोपालगंज, बिहार।

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मैंने इस ब्लॉग में हमारे आसपास घटित होने वाली कई घटनाक्रमों को चाहे उसमें ख़ुशी हो, दुख हो, उदासी हो, या उत्साहित करतीं हों, दिल को छु लेने वाली उन घटनाओं को अपने शब्दों में पिरोया है. कुछ को कविताओं का रूप दिया है, तो कुछ को लघुकथाओं का | यदि आप भी अपनी रचनाओं के द्वारा ' poetry in hindi' कविताओं के संकलन का हिस्सा बनना चाहते हैं या इच्छुक हैं तो आप सादर आमंत्रित हैं। (रचनाएं - कविता,लघुकथा,लेख,संस्मरण आदि।)

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December 18, 2021
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