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कहते थे साथ ना छोड़ेंगे हम - Hindi poem

कहते थे साथ ना छोड़ेंगे हम 

कहते थे साथ ना छोड़ेंगे हम, 
आज वो रिश्ते यूँ रुसवा हो गए |

मेरी होंठो पे हंसी देखेंगे हर दम, 
कहने वाले आज बेगाने हो गए|

आँखों में खुशियों की चमक देने वाले, 
आज उदासी का आलम दे गए |

छोटी - सी बात का तल्ख क्यूँ इतना, 
प्यार के वादे का हर जुमला झूठे हो गए |

इश्क में जला करते थे जो दिन - रात, 
अब वो परवाने नफ़रत में जल गए |

हो जाती सुलह माफ़ी दिल में रखने से, 
वो तो अपनी जिद के पैमाने हो गए|

हार में ही होती है, मुहब्बत की जीत
जीतने की जुस्तजू में वो जुदा हो गए |

दिल  धड़कता था जिसके लिए हर पल, 
वह दिल अब खौफ में गमजदा हो गए|

पहुंच जाते थे मेरी खामोशी में जो मुझ तक, 
वो आज लफ्जों में अलविदा कह गए||

(स्वरचित)
:- तारा कुमारी

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