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तमन्ना Tamanna - A Hindi short-story


तमन्ना हिंदी कहानी

                         तमन्ना

(कई बार हम अपने पास जो कुछ होता है उसकी कदर नहीं करते और उसकी उपेक्षा करते हैं |किन्तु, उसकी अहमियत उन लोगों की नजरों से देखनी चाहिए जो उस कमी से गुज़रते हुए जीते हैं |आज ऐसी ही एक कहानी आप सब के सामने है |) 

       तमन्ना, प्यारी-सी 4 वर्ष की एक छोटी सी बच्ची है. जिसकी दुनिया उसकी नानी और एक मामा तथा एक मौसी मे सिमटी हुयी है. 
      उसकी माँ उसे जन्म देते ही भगवान को प्यारी हो गयी थी. नन्ही अबोध बच्ची को देखकर सबकी आँखों में आँसू थे.
उसके और भी भाई - बहन थे, पिता भी थे किंतु तमन्ना की नानी ने स्वयं बच्ची के लालन - पालन का बीड़ा उठाने का निर्णय लिया. 
      तब से तमन्ना अपनी नानी के साथ ही पली - बढ़ी और घर के सभी सदस्यों याने मामा, मौसी, नानी के आँखों की तारा बन चुकी है. तमन्ना के नानाजी पहले ही गुज़र चुके हैं. 
      तमन्ना, अपनी नानी को ही माता-पिता का दर्जा देती है उससे अथाह स्नेह और ममता प्राप्त करती है.
       मामा भी कुछ कम नहीं थे. तमन्ना के साथ खूब मस्ती करते. उसके साथ बच्चे बन जाते. कभी कटहल दिखाकर तमन्ना को भ्रमित करते कि देखो तुम्हारे लिए इतना बड़ा लीची लाया हूँ. लेकिन तमन्ना भी बुद्धिमान थी, तुरंत ही समझ जाती और कहती - "मामाजी आप मुझे बुद्धू ना बनाओ. मुझे सब पता है. यह लीची नहीं है, यह तो लीची की तरह बस दिखता है. लीची तो छोटे- छोटे लाल - लाल होते हैं." 
          मामाजी यह सुनकर जोर जोर से हँसते और तमन्ना को प्यार से अपनी गोद मे उठा लेते. 
          तमन्ना अपनी मौसी सीमा के साथ खेला करती. घर मे लुका-छिपी खेलना उसे बहुत पसंद था. 
          तमन्ना के पिता कभी कभार मिलने आया करते थे. तमन्ना, पिता से मिलती लेकिन उसके लिए तो जैसे उसकी नानी माँ ही सबसे प्यारी दुनिया थी. 
          एक दिन तमन्ना सो रही थी. उसी बीच पड़ोस के वर्मा जी की पत्नी घर आयी. उसकी बेटी की शादी तय हो गयी थी. उसी सिलसिले मे वह तमन्ना की नानी जी को अपने घर लेने आयी थी. तमन्ना के मामाजी घर पर नहीं थे. मौसी अपने कमरे मे सो रही थी. तमन्ना की नानी ने सीमा को हिलाकर उठाते हुए अपने जाने की बात बतायी और तमन्ना का ख्याल रखने की हिदायत देते हुए तमन्ना को सोता हुआ छोड़कर घर से निकल गयी. 
       कुछ देर बाद तमन्ना की नींद टूट गयी. उसने आस-पास नानी को ना पाकर मौसी के कमरे मे गयी. मौसी को सोती देखकर वह चुपचाप वहीँ बिस्तर पर पास ही बैठ गयी. कुछ देर बाद जब सीमा की आंख खुली तो उसने तमन्ना को अपने करीब सोता हुआ पाया.
       उस दिन तमन्ना की नानी को घर वापस आने में काफी देर हो गयी. 
      तमन्ना को उसकी मौसी ने ही खाना खिलाया. जब रात को सोने का वक्त हुआ तब तमन्ना की नानी घर वापस आयीं. 
      आज पहली बार तमन्ना ने इतनी देर अपनी नानी के बगैर गुजारा था. 
       नानी को देखते ही तमन्ना उसकी गोद मे चली गयी. नानी उसके माथे को चूमकर प्यार कर ही रहीं थीं कि तमन्ना ने भोलेपन से अपने छोटे- छोटे दोनों हाथों मे नानी के चेहरे को लेते हुए पूछा - "नानी, अगर आप नहीं रहोगी तो मैं किसके साथ रहूँगी?" 
        नानी यह सुनते ही खामोश सी हो गयी. उसका कलेजा धक - सा कर गया. 
       उसके इस सवाल मे "नहीं रहोगी" का मतलब बहुत गहरा था. वो एक मासूम छोटी बच्ची थी लेकिन शायद उसके बालमन मे जीवन - मृत्यु की अनकहा समझ उसके मनोमस्तिष्क  मे कहीं विद्यमान था. ये बात नानी के हृदय को झकझोर देने वाला था. 
       तमन्ना को उसकी नानी ने कसकर अपने सीने से भींच लिया. 
      " क्यूं नहीं रहूँगी मैं? जब तक तुम होगी मैं भी हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगी"- कहते हुए नानी तमन्ना को गले से लगाकर उसकी पीठ सहलाने लगी. 
        तमन्ना थोड़ी ही देर मे नानी के स्नेहिल स्पर्श और दुलार पाकर नींद के आगोश मे चली गयी. 
        और तमन्ना की नानी के कानों मे तमन्ना के पूछे गए सवाल और शब्द गूंजते रहे.. 


(स्वरचित)
:तारा कुमारी

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Comments

  1. दिल को स्पर्श कर गई ये कहानी।तमन्ना का नानी से इतने समय तक दूर रहना उसे एक कटु सत्य के करीब ले आया।नानी भी इस दर्द को समझ चुकी थी।

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  2. हृदय स्पर्शी .. बहुत सुंदर

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