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मत भूलना Mat Bhulna - Hindi poem


 मत भूलना - हिंदी कविता/ Mat Bhulna (Hindi poem)

mat bhulna


मत भूलना..

कभी यह मत भूलना..

जब तुम रोते हो,

तब मेरा दिल भी रोता है।

आंसुओं का क्या है?

कभी आंखों से बाहर

तो कभी अंदर ही रह जाता है।

:- (तारा कुमारी)

(कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।)

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