मत भूलना Mat Bhulna - Hindi poem


 मत भूलना - हिंदी कविता/ Mat Bhulna (Hindi poem)

mat bhulna


मत भूलना..

कभी यह मत भूलना..

जब तुम रोते हो,

तब मेरा दिल भी रोता है।

आंसुओं का क्या है?

कभी आंखों से बाहर

तो कभी अंदर ही रह जाता है।

:- (तारा कुमारी)

(कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।)

मैंने इस ब्लॉग में हमारे आसपास घटित होने वाली कई घटनाक्रमों को चाहे उसमें ख़ुशी हो, दुख हो, उदासी हो, या उत्साहित करतीं हों, दिल को छु लेने वाली उन घटनाओं को अपने शब्दों में पिरोया है. कुछ को कविताओं का रूप दिया है, तो कुछ को लघुकथाओं का | यदि आप भी अपनी रचनाओं के द्वारा ' poetry in hindi' का हिस्सा बनना चाहते हैं या इच्छुक हैं तो आपका स्वागत है।

Poem
January 25, 2021
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