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इंतज़ार Intezaar-hindi poem

 
Intezaar
   

इंतज़ार

कुछ हलचल सी है सीने में
सुकून कुछ खोया - सा है
जाने कैसी है ये अनुभूति 
दिल कुछ रोया - सा है
कुछ आहट सी आयी है 
और दिल कुछ धड़का - सा है

हाथ - पाँव में हो रही कंपन-सी 
बेचैनी ये जानी पहचानी - सी है 
सांसे भी है कुछ थमी - सी 
कितने वक्त गुज़र गये इन्तजार में
मेरी आहें लेकिन ना हुई कम

पलकें अब मूँदने लगी हैं 
साँसें पड़ रही अब क्षीण
अब तो आ जाओ इन लम्हों में
जाने कब लौटोगे? 
आने का वादा था और ना भी था
पर, तेरा इन्तज़ार तो था.. 

सारी हदें तोड़ कर आ जाओ 
दुनिया की रस्मों को छोड़ कर आ जाओ 
चंद लम्हों के लिए.. 
अब तो आ जाओ कुछ पल 
सिर्फ मेरे लिए.. सिर्फ मेरे लिए |

(स्वरचित) 
:तारा कुमारी 



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