नाज़ Naaz - A hindi poem

 Poetry in Hindi - कविताओं का संकलन।

नाज़ ( हिंदी कविता ) / Naaz ( Hindi poem)

प्रियजनों से (separation) अलगाव/ जुदाई, हमेशा ही दर्द देता है। वजह चाहे जो भी हो। ये दर्द कभी ख़ामोशी में कहीं गुम हो कर अंदर ही अंदर चुभती  है तो कभी चीख चीख कर दर्द खुद को ही कम करने की कोशिश करती है।
कुछ ऐसी ही भावों से लिपटी ये छोटी से कविता आप सबके समक्ष प्रस्तुत है।

Naaz


नाज़

दूर हुए हम उनसे,
जो सांसों में बसा करते थे।

अनजान खौफ़ कैसा है ज़हन में,
जिसके लिए हम जिया करते थे।

अश्क सूख गए अब आंखों से,
दिन - रात उनके लिए रोया करते थे।

दिल टूटा है शायद,आवाज़ न हुई पर
खो गया वो कहीं...
जिस पर नाज़ हम किया करते थे।।

:- तारा कुमारी



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मैंने इस ब्लॉग / पत्रिका में हमारे आसपास घटित होने वाली कई घटनाक्रमों को चाहे उसमें ख़ुशी हो, दुख हो, उदासी हो, या हमें उत्साहित करतीं हों, दिल को छु लेने वाली उन घटनाओं को अपने शब्दों में पिरोया है. कुछ को कविताओं का रूप दिया है, तो कुछ को लघुकथाओं का | इसके साथ ही विविध-अभिव्यक्ति के अंतर्गत लेख,कहानियों,संस्मरण आदि को भी स्थान दिया है। यदि आप भी अपनी रचनाओं के द्वारा ' poetry in hindi' कविताओं के संकलन का हिस्सा बनना चाहते हैं या इच्छुक हैं तो आप सादर आमंत्रित हैं। (रचनाएं - कविता,लघुकथा,लेख,संस्मरण आदि किसी भी रूप में हो सकती हैं।) इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए पेज about us या contact us पर जाएं।

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March 17, 2022
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