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बादल Badal/Cloud - Hindi poem


बादल /Badal/Cloud - hindi poem (हिन्दी कविता) 

  क्या आपने कभी  नीले आसमान में बादलों को  अठखेलियां करते  देखा है?  बादलों को स्वच्छ नीले आसमान में देखना अभूतपूर्व होता है.. आइए, आज हम  आसमान में बिखरे  बादलों  को कविता के माध्यम से  करीब से देखें.. बादलों की कहानी कहती हुई प्रस्तुत है मेरी यह कविता...
Badal

  बादल

उमड़ते घुमड़ते श्वेत चमकीले बादल 
संग है इसके नीले आसमान की चादर 
ये छोटे बादल, बड़े बादल, सयाने बादल 
कभी ये भालू कभी खरगोश की भांति दिखते 
बच्चों के मन को ये खूब भाते
जरा, इन बादलों की मस्ती तो देखो.. 
सूरज के संग खेलते ये आंख मिचौली 
कभी नारंगी कभी पीत रंग से खेलते ये होली 
कभी शांत-चित्त  बिछ जाते आसमान के बिछौने में 
कभी खिसकते धीमे-धीमे हवा के मंद चाल में 
कभी दूधिया बर्फ-सी पर्वतों के सदृश्य अटल दिखते 
हरदम मुस्कुराते आसमान में ये
अपनी सुंदरता की छटा बिखेरते 
जब आ जाता वर्षा ऋतु.. 
आते ही ये अपना रंग बदल लेते
श्वेत उज्जवल काया को छोड़कर 
काला स्याह रूप धर लेते 
बिजली रानी भी तब रह रहकर 
चमक अपनी दिखाती
बादल भी तब गढ़-गढ़ करके खूब ताल मिलाते । 
हवा भी कभी मंद होती कभी तेज हो जाती 
बादल भी तब झूम झूम कर बरस जाते.. 
रिमझिम रिमझिम बरखा बनकर 
बारिश की ठंडी फुहारें
तन मन को भीगो जाता है 
प्रकृति की हरियाली हर तरफ निखर जाती है 
कल-कल करती नदियां गीत गाती हैं 
वातावरण संगीतमय हो जाता है 
ये नीले बादल ये काले बादल.. 
वर्षा बन सबके मन को ठंडक पहुंँचाते हैं, 
निस्वार्थ भाव से, 
समस्त जगत को वर्षा-जल दे जाते हैं । 

(स्वरचित) 
:-तारा कुमारी


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