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Showing posts from March, 2021

बे सिर पैर की ख्वाहिशें be sir pair ki khawahishen - Hindi poem

बे सिर पैर की ख्वाहिशें - हिंदी कविता/ Be sir pair ki khawahishen - Hindi poem. बे सिर पैर की ख्वाहिशें बस इतनी सी थी आरजू , मुझे जब दर्द हो... आपके दिल में दस्तक हो।   अगर रूठ जाऊं मैं, जमीं आसमां एक कर दे वो.. रिश्ते में कुछ ऐसी बात हो।  मेरे उल्टे सीधे अल्फाजों में भी,   बेइंतेहा प्यार ढूंढ़ ले जो..  ऐसी नज़रें मुझे इनायत हो।  नाज़ नखरे और झगड़ों के बीच बारी जब साथ देने की आए..  तो दोनों ओर से उल्फत हो। आए थे जमाने में जुदा-जुदा लेकिन जब जाने की बात हो.. हम साथ - साथ रुखसत हो। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) होली की खुमारी 2) खामोशियों में लिपटी चाहतें 3) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता 4) एक पड़ाव 5) फरेब 6) रिश्ते टूटे नहीं हैं 7) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 8) थोड़ा और की चाह 9) जरूरी है

होली की ख़ुमारी Holi ki Khumaari - Hindi poem

 होली की खुमारी - हिंदी कविता/ Holi ki khumaari - Hindi poem  इस वर्ष हम सब कोविड -19 के प्रकोप के साथ होली का त्यौहार मनाने के लिए बाध्य हैं। त्यौहार हमारे लिए जितना खास महत्व रखता है उतना ही जरूरी हमारी सुरक्षा भी है जिसे हम अनदेखा नहीं कर सकते। सावधानियों के साथ त्यौहार की खुशियों और एहसास को महसूस करने की मशविरा देती हुई ये छोटी सी कविता प्रस्तुत है:- होली की खुमारी  मन में है होली की खुमारी, पर भूल ना जाना सामाजिक दूरी। नासपीटे कॉरोना ने त्यौहार में खलल है डाली, प्रक्षालक और नासिकामुखसंरक्षक कीटाणुरोधी वायुछानक वस्त्र डोरी युक्त पट्टिका ने खतरे को है टाली। राग, द्वेष और बैर को गुलाल संग हवा में उड़ा कर, प्रेम ,स्नेह और अपनेपन की खुशबू चौतरफा महका कर। दुख व कटु अनुभवों को रंगों में धोकर भाईचारे का संदेश हृदय में प्रस्फुटित कर। नई उमंग और खुशियों को गले लगाना है, मिलकर..पैर पसारती कोरोना को दूर भगाना है । माना,मन में है होली की खुमारी पर अपनी सुरक्षा भी है बहुत जरूरी। दो गज की रहे दूरी,पर रहे ना दिलों में दूरी कर लो ऐसे ही.. मन के भावों को पूरी। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (1)प्रक्षालक

खामोशियों में लिपटी चाहतें khamoshiyon mein lipti chaahten - Hindi poem

 खामोशियों में लिपटी चाहतें - हिंदी कविता / khamoshiyon mein lipti chaahten - Hindi poem (कहते हैं, जब किसी से हम प्यार करने लगते हैं या करते हैं तो उनकी हर भावनाओं को बिना कहे समझते हैं या महसूस कर लेते हैं।लेकिन  जब कभी हम अपनी उम्मीदों को ही सिर्फ सर्वोपरि देखने लगते हैं तब परिस्थितियां उलझ जाती हैं। सामने वाले के हसरतों और उम्मीदों को समान महत्व ना देने से उनके लिए सब कुछ कितना कठिन हो जाता है हम समझ ही नहीं पाते। इन्हीं भावनाओं से लिपटी ये छोटी सी कविता प्रस्तुत है:- ) खामोशियों में लिपटी चाहतें दिल में मचलते हैं.. कई छोटी - छोटी बातें और ख्वाहिशें.. लेकिन जब भी  सूक्ष्म भावों को उनसे बांटने की  सोचता ये मन उनकी ही बातों का  रेला चल पड़ता। और ये नन्हा दिल बस मुस्कुरा कर कारवां में साथ हो लेता। उनकी हंसी के संग मैं भी चहक लेती। नमी जब उनकी  आंखों में दिखती, तो अपनेपन की  गरमाहट से  सफर की थकान  कम कर देती। कोई  तीखा तीखा मिलता तो कसकर हाथ थाम लेती। और मुश्किलों को उनकी आधा - आधा बांट लेती। पर जब होता मेरा सामना.. दबी छुपी कुछ  मेरे अरमानों से.. वो कहीं साथ दिखते नहीं, मेरे जज्बातों

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता mahila diwas par kavita - Hindi Poem

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता(हिंदी कविता)/ Antarashtreey Mahila diwas(hindi poem) / Poem on women's day. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता(  International women's day) तोड़ लो मुझे चाहे जितना निरीह प्राणी जानकर, लांछन लगा लो चाहे जितना अबला स्त्री मानकर। जब हाथ ना लगा सके तो, अंतर्मन की दृढ़ता पर प्रहार कर शीश झुकाने की  कर लो कोशिशें चाहे जितनी। चोट खाकर हीरे-सी कठोर रूप धर चुकी हूं मैं, पहले से और भी खूबसूरत हो चुकी हूं मैं। फ़र्क करना सिखा दिया है वक़्त और जमाने ने, किस बात को हृदय से लगाना है किसे दूर से ही इंकार कर देना है। अब ना चलेगा कोई छल तुम्हारा मेरी सरल भावनाओं पर, ना होंगी आहत अब मेरा कोमल मन विषैले, मिथ्या दंभ और कटु वचनों से। लगा लो जोर अब और कहीं.. जिसे खिलौने वाली गुड़िया समझ कर खेलते थे अब तक, वो जीती जागती नारी है।  नाज़ुक है लेकिन आग भी है स्त्री, जब खुद पर आ जाए तो आ ना जाए तेरी शामत कहीं। दया ,ममता और करुणा  की देवी है स्त्री, प्रेम और आदर की  पात्र है स्त्री। जीवन पर बराबरी का अधिकार  रखती है स्त्री।। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता

एक पड़ाव ek padaaw - hindi poem

  एक पड़ाव (हिंदी कविता) / Ek padaaw (hindi poem) ( इंसान की सबसे पुरानी और बड़ी गलतफहमी ये  है कि वो खुदको  सबसे अच्छा और बगैर कमी के व्यक्ति समझता है और ऐसे लोग इस घमंड में  दूसरों की कमी तो आसानी से देख लेते हैं और उसके लिए शोर भी मचाते हैं, बगैर सामने वाले के सही कारण जाने। लेकिन इस बीच उन्हें पता ही नहीं चलता कि लोगों की गलतियां या सौ कमियां दिखाते दिखाते खुद उन्होंने अपनी हजार कमियां जगजाहिर कर चुके होते हैं या हजार गलतियां कर लेते हैं। इसलिए हम सभी को बीच बीच में अपने जीवन की यात्रा में किसी छोटे से पड़ाव  में थोड़ी देर रुक कर आत्ममंथन कर आगे बढ़ने की मशविरा देती छोटी सी कविता प्रस्तुत है।) एक पड़ाव जब मन हो शांत निर्मल  तब सोचना निष्पक्ष होकर कुछ ख्याली खरपतवार उग आए हैं उद्विग्न होकर कटु शब्दों और लांछनों से सराबोर होकर जब चलोगे राह में उत्कंठा और पूर्वाग्रहों को लेकर मंजिल का तो पता नहीं.. साथी सभी खो जायेंगे, तुमसे मायूस होकर। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poe

जरूरी है Jaruri hai - Hindi poem

  जरूरी है... (हिंदी कविता)/ Jaruri hai (Hindi Poem) जरूरी है नवांकुर के लिए  धूप के साथ  नमी जरूरी है। बगिया के लिए फूलों के साथ कांटे जरूरी हैं। जिंदादिली के लिए हंसी के साथ आंसू जरूरी है। जिंदगी के लिए खुशी के साथ ग़म जरूरी है। रिश्तों के लिए बुनियाद के साथ प्यार जरूरी है। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) साथ तुम्हारे रहना था 2) फरेब 3) रिश्ते टूटे नहीं हैं 4) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 5) थोड़ा और की चाह