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Showing posts from January, 2021

साथ तुम्हारे रहना था Sath tumhare rahna tha - Hindi poem

  साथ तुम्हारे रहना था (हिंदी कविता)/ Sath tumhare rahna tha (Hindi Poem) साथ तुम्हारे रहना था। साथ तुम्हारे रहना था, संग रहने के अरमान में ख़ामोश धीमी मौत को  गले लगा लिया मैंने। साथ तुम्हारे हंसना था, हंसने की चाह में दामन को आंसुओं से सजा लिया मैंने। और, एक वो हैं जो हर चोट देकर भी, अपने हाथ मेरे हाथों से  छुड़ाकर भी... ना चेहरे में शिकन कोई ना दिल में अफसोस लिए बड़े मासूम और अनजान बने मुस्कुराते हैं। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) एक फरेब 2) थोड़ा और की चाह 3) सीख रही हूं मैं 4) रिश्ते टूटे नहीं हैं 5) प्यार मोहब्बत इश्क़

एक फ़रेब Ek Fareb - Hindi poem

एक फ़रेब(हिंदी कविता)/ Ek Fareb(Hindi poem) एक फ़रेब अगर कोई तुमसे बच रहा हो तो परेशान ना हो। सोचो...अच्छा हुआ, तुम बच गए, एक फ़रेब से। । (:- तारा कुमारी) (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) रिश्ते टूटे नहीं हैं 2) प्यार मोहब्बत इश्क़ 3) मत भूलना 4) पढ़ लो 5) अगर वो नहीं तो क्या हुआ

रिश्ते टूटे नहीं हैं Rishte tute nahin hain - Hindi poem

  रिश्ते टूटे नहीं हैं (हिंदी कविता)/rishte tute nahin hain (Hindi poem) रिश्ते टूटे नहीं हैं.. उम्मीद नहीं कोई तुमसे अब शिकवा नहीं कोई तुमसे रिश्ते टूटे नहीं हैं ..अब भी। बस,उलझी हूं एक डोर से हां.. खामोशी ने चुपके से, दोस्ती कर ली है मुझसे।। ~~~ (: - तारा कुमारी) (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) प्यार मोहब्बत इश्क़ 2) मत भूलना 3)  पढ़ लो 4) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 5) क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो 6) थोड़ा और की चाह 7) वक़्त के सीने में 8) कविता की छटा 9) बहती नदी सी 10) रूठे बैठे हो क्यों

प्यार मोहब्बत इश्क़ pyaar mohabbat ishq - poem

प्यार, मोहब्बत,इश्क़ ( हिंदी कविता)/pyaar, mohabbat,ishq ( Hindi poem) प्यार,मोहब्बत,इश्क़  बड़े नादान हैं वो जो पूरी प्रेम कहानी की ख्वाहिश रखते हैं।  यहां तो.. प्यार, मोहब्बत,इश्क़ बेचारे एक-एक अक्षर  खुद ही अधूरे फिरते हैं। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) मत भूलना 2) पढ़ लो 3) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 4) क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो 5) थोड़ा और की चाह

मत भूलना Mat Bhulna - Hindi poem

 मत भूलना - हिंदी कविता/ Mat Bhulna (Hindi poem) मत भूलना.. कभी यह मत भूलना.. जब तुम रोते हो, तब मेरा दिल भी रोता है। आंसुओं का क्या है? कभी आंखों से बाहर तो कभी अंदर ही रह जाता है। :- (तारा कुमारी) (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) पढ़ लो 2) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 3) क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो 4) थोड़ा और की चाह 5) वक़्त के सीने में

पढ़ लो Padh lo - Hindi poem

पढ़ लो..(हिंदी कविता)/Padh lo..( Hindi poem) पढ़ लो..  (हिंदी कविता) शब्द  नहीं,  आज.. कुछ लिखने को। ~~~ पढ़ सको तो, पढ़ लो.. कोरे कागज को।। ~~~ (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) अगर वो नहीं तो क्या हुआ 2) क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो 3) थोड़ा और की चाह 4) वक़्त के सीने में 5) कश्मकश

अगर वो नहीं तो क्या हुआ Agar wo nahin to kya huwa - Hindi poem

  अगर वो नहीं तो क्या हुआ( हिंदी कविता)/Agar wo nahin to kya huwa(Hindi Poem) (सदियों से प्यार को अलग अलग तरह से देखा समझा और महसूस किया जाता रहा है। उन्हीं में से एक एहसास को शब्दों में अभिव्यक्त करती ये छोटी सी कविता प्रस्तुत है।) अगर वो नहीं तो क्या हुआ.. तकदीर में हमारी  अगर वो नहीं तो क्या हुआ.. उनकी चाहतों में  हम बसते हैं।  उनके साथ चलना  मुमकिन नहीं तो क्या हुआ.. उनकी सांसों में  हम संग चलते हैं। इश्क की ये भी  इक इंतेहां है दोस्तों.. उनकी हरेक यादों में  सिर्फ, हम महकते हैं। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो 2) थोड़ा और की चाह 3) वक़्त के सीने में 4) कश्मकश 5) मेरी मुहब्बत इतनी खूबसूरत ना थी 6) कविता की छटा

क्या तुम भी ऐसे अपने ग़म छुपाते हो Kya tum bhi aise apne gham chhupate ho - Hindi poem

क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो! (हिंदी कविता)/ Kya tum bhi aise apne gham chhupate ho! (Hindi poem) (कहते हैं रोना कमज़ोरी की निशानी है, लोग दूसरों के सामने रोने से बचते हैं।लेकिन ये भी सच है कि रोना दिल के बोझ को कम करने का एक स्वाभाविक तरीका है।)  क्या तुम भी ऐसे अपने गम छुपाते हो! जब मन हो आहत  और राहत की हो चाहत तब सबके सामने चेहरे पर हंसी ओढ़कर चुपके से फिर छत के कोने में छुपकर जी भर कर रो लेते हो? क्या तुम भी ऐसे .. अपने गम छुपाते हो! किसी को ना देख आंखो में नीर दरिया बनकर मचल जाती है, और किसी के आने की आहट से  झटपट  रेगिस्तान बन जाती है। क्या तुम भी ऐसे.. अपने गम छुपाते हो! जब हृदय उदास होता है रूठा रूठा सा तन मन होता है, फिर भी अभिनय में सबको मात देकर खुदको मस्त मौला दिखाते हो? क्या तुम भी ऐसे.. अपने गम छुपाते हो! कभी जब आंसू को ना मिले बह जाने की पसंदीदा जगह तो चुपचाप जद्दोजहद से नमी को पीकर मुस्कुरा जाते हो? क्या तुम भी ऐसे.. अपने गम छुपाते हो! (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक

थोड़ा और की चाह Thoda aur ki chah - Hindi poem

थोड़ा और की चाह ( हिंदी कविता)/ Thoda aur ki chah(Hindi Poem) ( कभी कभी हम उन खुशियों को नहीं देख पाते या उनकी कद्र नहीं करते जो हमारे आस पास  होती हैं।हमें ज्यादा की चाह इतनी हो जाती है कि कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते हैं चाहे वो रास्ता गलत ही क्यूं ना हो, जो बाद में हमें सिर्फ बदले में दुख देती है। जीवन में सुख दुख आते रहते हैं। हमें उनका समान रूप से स्वागत करना चाहिए और अडिग होकर अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।जो कमजोर हो जाते हैं वो सब कुछ खो देते हैं।) इन्हीं भावनाओं को उकेरती ये कविता प्रस्तुत है:-   थोड़ा और की चाह थोड़ा और की चाह में  जो पास है वो मत गवाना, अथाह खुशियों की चाह में कहीं गमों को ना समेट लेना। छोटी छोटी खुशियां भी जिंदगी में रंग भर देती हैं, थोड़ा और की जिद, इसमें कड़वाहट घोल देती है। जैसे दिन के बाद रात आती है खुशियां भी अपना रंग बदलती है, कभी उदासी कभी आंसू बनकर जीवन के रंगमंच में भूमिका निभाती है। थोड़ा सब्र कर जिंदगी के टेढ़े मोड़ पर कर ले हर पल की तू  बंदगी, तपकर तू बनेगा एक दिन सोना विकल होकर खुदको मत खोना। रास्ते में नहीं बिछे होंगे फूल सदा कांटे भी मिलेंगे

वक़्त के सीने में Waqt ke seene mein

  वक़्त के सीने में (हिंदी कविता)/Waqt ke seene mein (Hindi poem) (कालचक्र ने हमेशा ही संसार को नये नये दौर दिखाए हैं। इन परिस्थितियों में हम सब को हमेशा ही मिलकर भाई चारे का भाव लिए कठिन समय का सामना करने की आवश्यकता रही है।चाहे वह कोई प्राकृतिक आपदा हो या युद्ध जैसे विनाशकारी संकट हो।आज हम जिस समसामयिक संकट से जूझ रहे हैं उससे ओतप्रोत छोटी सी कविता प्रस्तुत है:-) वक़्त के सीने में हम बांधते हैं वक़्त को एक पैमाने में कभी साल कभी दिन कभी महीने में कई दौर गुजर जाते हैं वक़्त के सीने में हम उलझे रहते हैं जन्म-मृत्यु के ज़ीने में नहीं मज़ा  है बेमतलब सुख चैन खोने में क्यूं इंसान खुश नहीं है एक साथ होने में दिन रात बिता देते है दूसरों को तौलने में खुद भले ही हों बदनाम  पूरे महकमे में दुनिया को दिखाया है भविष्य,वक़्त ने आइने में खड़ा है तू विकराल मुंह खोले मौत के दरवाजे में कुछ ही फासला होता है जान गवाने में अरसे निकल जाते हैं गुजर बसर जुटाने में जान हलक में रख बीती है 2020 कोविद-19 में दो हजार इक्कीस थोड़ी मिसरी घोल जाए जीवन में आओ जगा कर प्रेम भाव अपने मन के कोने में  लग जायें हम सब प्रक