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Showing posts from August, 2021

माफ़ कर देना Maaf kar dena - Hindi poem

  माफ़ कर देना ( हिंदी कविता) / Maaf kar dena ( hindi poem) माफ़ कर देना माफ़ कर देना बनी मैं तेरी परेशानियां, माफ़ कर जाना हुई मुझसे नादानियां। मान लिया तुझको मैंने अपनी सारी दुनिया, मांग लिया तुझसे सारे जहां की खुशियां। माफ़ कर देना बनी मैं तेरी परेशानियां, माफ़ कर जाना हुई मुझसे नादानियां। माना हो गई मुझसे सौ गलतियां, दो दिन की जुदाई भी लगी सदियां। माफ़ कर देना बनी मैं तेरी परेशानियां, माफ़ कर जाना हुई मुझसे नादानियां। काटने लगी थीं तेरी बेरुखी और दूरियां  समझ न पाई मैं दिवानी, तेरी मजबूरियां। माफ़ कर देना बनी मैं तेरी परेशानियां माफ़ कर जाना हुई मुझसे नादानियां। मिट जाती तेरे राहत भरे दो बोल से तन्हाईयां, मेरे दिल की थी बस यही छोटी- छोटी कहानियां। माफ़ कर देना बनी मैं तेरी परेशानियां, माफ़ कर जाना हुई मुझसे नादानियां। नहीं है दिल जीतने की मुझमें खूबियां हिस्से में आती हैं मेरे अक्सर ही तल्खियां! माफ कर देना, बनी मैं तेरी परेशानियां माफ कर जाना हुई मुझसे नादानियां। (स्वरचित) :- तारा कुमारी ( कैसी लगी आपको यह गीत/कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके स

क्या जिक्र करूं मैं kya zikar karun main - Hindi poem

  क्या जिक्र करूं मैं ( हिंदी कविता) / kya zikar karun main (Hindi poem) क्या जिक्र करूं मैं क्या जिक्र करूं मैं अपनी मुहब्बत का जिस मुहब्बत को मुझसे मुहब्बत ही नहीं! दिन - रात कसक में घुलता है मन मेरा  तमाम दुनियादारी की फिक्र है उसे, जरूरी और जरूरत की लंबी फेहरिस्त में  बस एक मैं ही हूं, जो जरूरी नहीं। क्या जिक्र करूं मैं अपनी मुहब्बत का जिस मुहब्बत को मुझसे मुहब्बत ही नहीं।। ख्वाब तो देखे बहुत-सी मुहब्बत को लेकर  पर किए ख्वाहिशों से ज्यादा समझौता मैंने। इस मुहब्बत के सौदेबाजी में भी, दो पल राहत के मेरे नसीब में नहीं। क्या जिक्र करूं मैं अपनी मुहब्बत का जिस मुहब्बत को मुझसे मुहब्बत ही नहीं।। खुशी और गम सब राब्ता है मेरे उनसे, उनकी हर गली का रास्ता है जुदा मुझसे, उम्मीदों की नाव खेती, राह ताकती उनकी  लेकिन.. सबसे वास्ता है उनका,बस एक मुझसे ही नहीं। क्या जिक्र करूं मैं अपनी मुहब्बत का जिस मुहब्बत को मुझसे मुहब्बत ही नहीं।। नहीं कर सकती बयां शब्दों से क्या दिल पर मेरे गुजरती है, जब उनकी बेरुखी शूल की तरह चुभती है, आंखों से रिसते हैं वो जख्मों के लावा हैं,आंसू नहीं। पिघला दे जो पत्थर को

बेवजह Bewajah - Hindi poem

बेवजह / Bewajah - हिंदी कविता/ hindi poem बेवजह  कभी हो जाती है  बेवजह ही   जिंदगी गुलजार ! कभी सौ वजह भी  मुस्कुराने के लिए   लगती है बेज़ार !! (स्वरचित) :- तारा कुमारी ( कैसी लगी आपको यह छोटी सी कविता? जरूर बताएं। यदि पसंद आए या कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे। आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है।) More poems you may like:- 1) मुझे कोई मनाए 2) आहिस्ता आहिस्ता 3) दिल मासूम होता है 4) कहते थे साथ ना छोड़ेंगे हम 5) दिल मेरा यूं छलनी हुआ 5) वक़्त और त्रासदी 6) बहती नदी - सी 7) मुड़कर ना देखना अब पीछे कभी 8) बे सिर पैर की ख्वाहिशें 9) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता 10) एक पड़ाव