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Showing posts from August, 2020

याद है ना तुम्हें Yaad hai na tumhen - A Hindi poem (हिंदी कविता)

  याद है ना तुम्हें Yaad hai na tumhen- Hindi poem (हिंदी कविता) याद है ना तुम्हें / Yaad hai na tumhen याद है ना तुम्हें.. पहली दफा, जब कलम मेरी बोली थी तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां मैंने पिरोई थी। तुम्हारे गुजरे पलों में बेशक मैं नहीं थी तुम्हारे संग भविष्य की अपेक्षा भी नहीं थी हां,वर्तमान के कुछ चंद क्षण साझा करने की ख्वाहिश जरुर थी। याद है ना तुम्हें.. पहली दफा, जब कलम मेरी बोली थी तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां मैंने पिरोई थी। देखो, आज फिर उंगलियों ने मेरी कलम उठाई है कुछ अनसुनी भावनाओं को संग अपने समेट लाई है माना ,मेरे शब्दों ने आहत किया तुम्हें लेकिन क्या,असल भाव को पहचाना तुमने? याद है ना तुम्हें.. पहली दफा, जब कलम मेरी बोली थी तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां मैंने पिरोई थी। उलझ गए तुम निरर्थक शब्दों में पढ़ा नहीं जो लिखा है कोमल हृदय में चल दिए छोड़ उसे, तुम अपनी अना में बंधे थे हम तुम, जिस अनदेखे रिश्ते की डोर में याद है ना तुम्हें.. पहली दफा, जब कलम मेरी बोली थी तुम पर शब्दों की कुछ लड़ियां

धरा / धरती /Dhara/Dharti (Earth) - A Hindi poem

धरा / धरती /Dhara / dharti/Earth - A hindi poem( हिंदी कविता)   धरा/धरती /पृथ्वी पर कविता धरा,माता है हम इनकी संतान सर्वत्र हरियाली,है इसकी शान विविधता है इसकी पहचान। माटी के हैं कई रंग वन और वन्य जीव हैं इनके अंग सदा ही प्रेम दिया है धरा ने मानव को पुलकित होती जैसे देख माता बच्चों को। दात्री है धरा पर हमने है क्या दिया? सर्वदा ही उपभोग किया सुखों का कभी न समझा मर्म, धरा के दुखों का। स्वार्थ में अंधे होकर हम वीरान कर रहे धरा को हरियाली है श्रृंगार इसका बना रहे बंजर इसको। फैला कर प्रदूषण माता के मातृत्व का कर रहे हम दोहन वक़्त रहते हम संभल जाएं.. धरा रूपी माता को  निर्बाध वात्सल्य बरसाने दें, तभी विश्व में होगी खुशियाली समस्त जगत होगी स्वस्थ और निरोगी और  ये धरती भी होगी बलिहारी। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आए तो मेरे उत्साहवर्धन हेतू अपना आशीर्वाद दें।और कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है। )  More poems you may like:- 1. संकल्प/ प्

संकल्प / Sankapl / प्रतिज्ञा / Pratigya/इरादा / Irada/ (Determination) - A Hindi Poem

संकल्प/Sankalp/प्रतिज्ञा/ pratigya/ इरादा irada/ Determination - हिंदी कविता संकल्प / प्रतिज्ञा / इरादा इरादा जो हो सर्वस्व कल्याणकारी जन-जन के हित में जो हो लाभकारी लाख रोड़े खड़े हो जाएं तो क्या दृढ़ निश्चय से कर लो मुट्ठी में दुनिया सारी। ये जगत है फूल और कांटों की क्यारी संकल्प ना टूटे कभी रखो इनसे ऐसी यारी जीवन छोटी है तो क्या पक्के इरादों से खेलो अपनी पारी। कर्तव्य पथ पर पदयात्रा रखो जारी कंधों पर हो चाहे जिम्मेदारी भारी कभी गर मुंह की खानी पड़ी तो क्या हार के बाद जीत होती है सबसे प्यारी। (स्वरचित) :- तारा कुमारी (संकल्प/प्रतिज्ञा/इरादा पर ये कविता - कैसी लगी आपको ?जरूर बताएं। यदि पसंद आए तो मेरे उत्साहवर्धन हेतू अपना आशीर्वाद दें।और कोई सुझाव हो तो कमेंट में लिखे आपके सुझाव का हार्दिक स्वागत है। )  More poems you may like:- 1. मातृत्व 2. बेटियां 3. सपने 4. अनकहे किस्से

मातृत्व / Matritwa / Motherhood - A Hindi poem

मातृत्व /   Matritwa / Motherhood - A Hindi poem ( हिंदी कविता) / मातृत्व पर कविता       मातृत्व नन्हीं सी धड़कन जब स्त्री के कोख में धड़कनों के संग लय मिलाती है,  वह क्षण स्त्री के लिए मातृत्व का अनमोल प्रतीति होती है..  स्त्री स्वत: ही मां में परिवर्तित हो जाती है। मां और अजन्मे बच्चे का अटूट रिश्ता अंतिम सांस तक बंध जाता है, सुकोमल रुई के फाहे सी संतानें जब माता की गोद भर जाते हैं, तब मां सिर्फ एक स्त्री नहीं.. मौत को मात देकर स्वयं के अंश की जननी बन जाती है। मां बच्चे के लिए हर दुख उठाती है हर खुशियां उन पर निछावर करती है जीवन की पहली शिक्षिका माता ही तो होती है हर कठिनाइयों से पार पाने का मंत्र बड़े प्यार से मां बच्चे को सिखलाती है। मां की मातृत्व की व्याख्या नि:शब्द है, जीवन की हर झंझावात की पहरेदार मां ही तो होती है, जीवन-मरण के चक्र में.. स्वर्ग भी मां और ईश्वर की किरदार भी मां होती है । (स्वरचित) :- तारा कुमारी More poems you may like:- 1. बेटियां 2. सपने 3. आऊंगा फिर 4. Father's day (कैसी लगी आपको

बेटियाँ/ Betiyan / (Daughters) - A Hindi poem

बेटियाँ/ Betiyan / (Daughters) - A Hindi poem (हिंदी कविता)         बेटियाँ /बेटी पर कविता रिश्तों की एक खूबसूरत एहसास होती हैं बेटियाँ घर की रौनक, उदासियों में खिलखिलाहट अंधियारे में उजियारा होती हैं बेटियाँ.. जीवन डगर की बेशकीमती सौगात होती हैं ये बेटियाँ। निश्छल मन के भावों से ओतप्रोत चिलचिलाती धूप में भी शीतल छांव होती हैं बेटियाँ उम्र के हर पड़ाव में, हर सुख-दुख में, माता-पिता की परछाई होती हैं ये बेटियाँ। जग कहे पराया धन बेटी को पर इंद्रधनुष के सात रंगों की तरह कभी मां, कभी बहन.. ना जाने कितने रिश्तों में बंध जाती हैं ये बेटियाँ। जब हर रिश्ते साथ छोड़ जाते हैं तब पूर्ण समर्पण से अडिग साथ खड़ी रहती हैं ये  बेटियाँ मां की ममता में पली,पिता के गर्व में लिपटी स्वर्ग से उतरी परी होती हैं ये बेटियाँ। परिवार को एक डोर में पिरोकर रखती हैं ये बेटियाँ कम नहीं ये किसी से.. यूं समझ लो - बेमिसाल होती हैं बेटियाँ रिश्तों की एक खूबसूरत एहसास होती हैं बेटियाँ।। (स्वरचित) :-तारा कुमारी (कैसी लगी आपको यह कविता?जरूर बताएं। यदि पसंद आ