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Showing posts from May, 2020

विरह - वेदना Virah Vedana Hindi - poem

विरह - वेदना  शीशे का ह्रदय उस पर नाम लिखा कोई  ठेस लगी टूट गया,चूर हुए सपने  है रोती आंखें, जान सके ना कोई  है दिल तो अपना लेकिन प्रीत पराई   हूक उठी दिल से, अश्कों ने ली जगह आंखों में  क्या हुआ, जान ना पाए कोई
 उदास आंखें राह देखती नजरें  ना कोई आस, फिर भी आशा के दीप जले  बुझती, ताकती आशाएं  हृदय को चीरती,  फफक कर रो पड़ती आंखें  क्रंदन करता मन, जान सके ना कोई
 साथ ना छोड़ेंगे कभी, ये वायदा था  याद ना रही अब मैं, जो मेरा जीवन था  ना किया स्वीकार गुनाह अपना  लाद दिया हर बोझ मुझ पर   नन्हीं चिड़िया टूट गई,  रूठ गई, जग से छूट गई 
 था वह कैसा बेरहम दिल   जब मन भरा छोड़ गया  मासूम दिल को तोड़ गया  ना देखा मुड़कर पल भर भी  आंसू बहते अब भी याद में उसके   धोखे थे हसीन, दिल से लगाया था मैंने
 सच माना था मैंने, अपना जाना था मैंने  दिल टूट गया,   साथ छूट गया   लेकिन अब भी भरम है वफा का   टूटेगा वह भी धीरे-धीरे   भूल जाना है मुश्किल, क्या करें? 
 कुछ तो सुकून मिल जाए दिल को   कुछ ऐसा हो जाए   नहीं देखा जाता इसका तड़पना, तरसना, बरसना   जीना भी जरूरी है, कैसे जिया जाए?   कांपता है देह,   ना मान…

इंतज़ार Intezaar-hindi poem

इंतज़ार कुछ हलचल सी है सीने में सुकून कुछ खोया - सा है जाने कैसी है ये अनुभूति  दिल कुछ रोया - सा है कुछ आहट सी आयी है  और दिल कुछ धड़का - सा है
हाथ - पाँव में हो रही कंपन-सी  बेचैनी ये जानी पहचानी - सी है  सांसे भी है कुछ थमी - सी  कितने वक्त गुज़र गये इन्तजार में मेरी आहें लेकिन ना हुई कम
पलकें अब मूँदने लगी हैं  साँसें पड़ रही अब क्षीण अब तो आ जाओ इन लम्हों में जाने कब लौटोगे?  आने का वादा था और ना भी था पर, तेरा इन्तज़ार तो था.. 
सारी हदें तोड़ कर आ जाओ  दुनिया की रस्मों को छोड़ कर आ जाओ  चंद लम्हों के लिए..  अब तो आ जाओ कुछ पल  सिर्फ मेरे लिए.. सिर्फ मेरे लिए |
(स्वरचित)  :तारा कुमारी 
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1. कहते थे साथ ना छोड़ेंगे हम
2. दुःस्वप्न - कोरोना से आगे
3. निःशब्द
4. यादें
5. कुछ पंक्तियां "नवोदय" के नाम





चुनौती Chunautee - A short- story

चुनौती  (हम अपने जीवन में प्रत्येक दिन अलग-अलग चुनौतियों का सामना करते हैं |और उस चुनौती का सामना हम किस प्रकार करते हैं, यह हम पर निर्भर करता है|आज ऐसे ही एक चुनौती के साथ स्वाति की कहानी आप सबके साथ साझा कर रही हूं|)           स्वाति की गोद में 9 माह का उसका पुत्र सौरभ बड़े चैन की नींद सो रहा था|वहीं स्वाति की नींद उड़ी हुई थी |          अगले ही महीने उसके पोस्ट- ग्रेजुएशन के प्रथम वर्ष की परीक्षा शुरू होने वाली थी| स्वाति का आधा वक्त कॉलेज में गुजरता तथा घर वापस लौटने पर सौरभ के देखभाल में बाकी वक्त गुजर जाता|         उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह परीक्षा की तैयारी कैसे करें?         पति दीपक से कोई खास मदद नहीं मिलती थी|सुबह जल्दी घर से ऑफिस के लिए वह निकल जाते तथा वापसी में देर शाम हो जाया करती| स्वाति घर के काम एवं बच्चे की देखभाल के साथ पढ़ाई भी करती|          स्वाति के लिए सौरभ की देखभाल जहां एक ओर अत्यंत महत्वपूर्ण था तो परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना उसका सपना भी था |         लेकिन समय का अभाव था| स्वयं की देखभाल भी माता होने के नाते आवश्यक था| इन सार…

सपनों की उड़ान Sapno ki udaan - hindi short - story

सपनों की उड़ान        मधु के लिए आसमान से अपने करीब बादलों को देखना सिर्फ ख्वाब पूरा होना नहीं था बल्कि एक जंग जीतने जैसा भी था.. बादलों का कभी समंदर की तरह दिखना कभी असंख्य पहाड़ों की तरह दिखना बहुत रोमांचकारी था.. सूर्य की चमकती किरणें  बिलकुल पास प्रतीत होना भी कम रोमांचक न था.        मधु की ये पहली हवाई यात्रा थी. उसने खास तौर से खिड़की वाली सीट खुद के लिए लिया था. इस यात्रा तक  पहुंचने में मधु ने कम उतार चढ़ाव नहीं देखे.
     ..मधु आज भी अपनी हवाई यात्रा को बार बार याद करती और मुस्करा उठती है.. उसके तन-मन मे एक अजीब सी खुशी की लहर दौड़ जाती... सपने पूरे होने के एहसास की खुशी. अपने आप ही चेहरे पर मुस्कान दौड़ जाती.
       जब लॉकडाउन में दूरदर्शन पर रामायण के दुबारा प्रसारण की बात मधु ने सुना तो सहसा उसकी याद ताजा हो गयी और वह  मुस्कुरा उठी..
       रामायण से एक विशेष जुड़ाव था मधु का.. उसके एक सपने का... बात उन दिनों की है जब मधु सिर्फ सात वर्ष की थी| तब पहली बार रामायण टीवी पर प्रसारित हो रहा था उस समय रामायण का जो क्रेज था, वह देखने लायक था|
       लोगों के प…

कर भला तो हो भला - Hindi Short - story

कर भला तो हो भला
       रीना दसवीं कक्षा की छात्रा है तथा अपने माता-पिता तथा भाई-बहनों के साथ गर्मी की छुट्टियां मनाने शहर से गांव आई है |        गांव में अपना पुश्तैनी मकान है |वहां की हरियाली हरे भरे खेत रीना को खूब आकर्षित करते हैं | खास कर दो चीजें- एक तो घर के पास एक तालाब का होना जहां बच्चे मछलियां पकड़ते तथा तालाब के किनारे इमली के पेड़ में झूले डालकर पूरे दिन झूला झूलते |       वहीं घर से कुछ दूरी पर  खेतों के ठीक बीचोबीच एक पुराना शिव मंदिर है जहां रीना प्रत्येक दिन शाम के वक्त जरूर जाया करती तथा माथा टेक कर ही वापस आती| पता नहीं क्यों वहां जाकर रीना को बहुत ही शांति और सुकून महसूस होता| उस मंदिर के शिवलिंग के ऊपर हर वक्त एक छोटे मटके से जल की बूंदें गिरती रहती |         एक दिन की बात है, रीना के साथ उसकी छोटी बहन टीना ने भी शिव मंदिर जाने की जिद की |          टीना कक्षा 6 की छात्रा थी| टीना का स्वभाव बहुत ही चंचल था| वह कभी भी किसी बात को गंभीरता से नहीं लेती और सारा दिन हंसती खेलती व्यस्त रहती|         पिताजी उसे अक्सर ही डांट दिया करते ताकि वह  पढ़ाई पर भी …

मातृ-दिवस Mother's day - Hindi poem

मातृ-दिवस माँ जननी है, जन्मदात्री है  प्रेम की अविरल बहती समंदर है  दुखों को झेलती अडिग पर्वत है  स्नेह की वर्षा करती फुहार है 
ना होती इस रिश्ते में मिलावट  ना होती कभी चेहरे में थकावट  लबों में रहती हरदम दुआएँ  पूत हो जाए कपूत, ना होती कुमाता 
माँ की आँखें थक कर बंद होती भले  पर सोते में भी होती फिक्रमंद  है माँ ही प्रथम शिक्षिका  है माँ ही प्रथम सखा
माँ तो है प्रेम की अनंत सरिता  कैसे व्यक्त करूँ मैं शब्दों में  नहीं समा सकती तुम  शब्दों के अर्थों में.. 
नहीं है मोहताज माँ का प्रेम एक दिवस की,  हर दिन ही है मातृ-दिवस ना देना कभी दुःख माँ को  आदर करो माँ का उम्रभर.. 
यहीं है स्वर्ग यही है धर्म  है मातृ-दिवस की भेंट यही |
(स्वरचित)  :- तारा कुमारी
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यकीन
कहते थे साथ ना छोड़ेंगे हम
किताब की व्यथा
सूक्ष्म - शत्रु


यकीन yakin - Hindi poem

यकीन  यकीन - तीन अक्षरों से बना यह शब्द इस के हैं खेल निराले  कभी यकीन कर कोई खिल गया तो किसी के जीवन में पड़ गए शून्य  धोखे मिले हजार कभी कभी सौगात खुशियों की  कभी दोस्त बना दे पल में कभी लगा दे हजार पहरे  जब रूठ जाती है यह बिखर जाता है सब पल में यकीन जब वास करती है मन में  सब कुछ खिल जाता है जैसे पल में अजीब है दास्ताँ यकीन का  नहीं दिलाना पड़ता यहां यकीन नफरत का मगर हैरत है, सबूत मांगते लोग मोहब्बत का एक वक्त वह था जब जादू पर भी यकीन था  एक वक्त यह है  जब हकीकत पर भी शक है अगर करना ही है यकीन  तो कर खुद पर यकीन तू  ना टूटेगा तू कभी, ना रूठेगा तू  हिम्मत जो कभी कम हुई तो उठ खड़ा होगा फिर तू रख विश्वास खुद पर -  है यही रास्ता, नहीं रहेंगे सपने अधूरे मिलेगी मंजिल तुझे, ख्वाब होंगे सारे पूरे|
(स्वरचित)  :-तारा कुमारी More poem you may like :-1. कहते थे साथ ना छोड़ेंगे हम 2. किताब की व्यथा
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दुःस्वप्न-कोरोना से आगे (Nightmare - beyond Corona ) - Hindi poem

दुःस्वप्न - कोरोना से आगे है खड़ा ये विकराल सवाल राजस्व का है ये कैसा जाल लॉकडाउन की कहां गई सख्ती क्या है ये लालसा पाने की तख्ती?  सरकार ने खोला मधुशाला का द्वार   सोशल डिस्टेंसिंग का हुआ बुरा हाल  क्या होगा भगवन देश का- आपदा क्या कम थी कोरोनावायरस का?
वित्तीय आपातकाल की आशंका है क्या देश को..
केंद्र ही चलाएगा क्या राज्यों को?
रिश्ते तो हो ही चुके थे ऑनलाइन
पढ़ाई भी अब हो गयी है ऑनलाइन
क्या गुरुओं का अब महत्त्व रहेगा!
जब ह्वाटसअप से देश चलेगा..  गरीबों की गरीबी अब और बढ़ेगी  पूंजीपतियों की अब खूब चलेगी  मध्यमवर्ग जब नहीं रहेगा
न्याय की लड़ाई तब कौन लड़ेगा  निम्न या उच्च वर्ग ही जब रह जाएगी  एक पर होगा राज, दूसरा भोगेगा विलास जैविक हथियार  के उपयोग से होगा शक्ति-प्रदर्शन  क्या आएगा अब तानाशाही का जेनेरेशन?  है चिंतित करती ये दुर्दशा मन होता विचलित, होती हताशा
है कैसी ये दुःस्वप्न..  क्या होगा इस देश का कल?  है खड़ा  ये विकराल सवाल,  है खड़ा ये विकराल सवाल..!! 
(स्वरचित)  :-तारा कुमारी More Poem you may like :-1. वक्त और त्रासदी
2. डॉक्टर, नर्स और अस्पताल
3. किताब की व्यथा
4. भावन…

कहते थे साथ ना छोड़ेंगे हम - Hindi poem

कहते थे साथ ना छोड़ेंगे हम  कहते थे साथ ना छोड़ेंगे हम,  आज वो रिश्ते यूँ रुसवा हो गए |
मेरी होंठो पे हंसी देखेंगे हर दम,  कहने वाले आज बेगाने हो गए|
आँखों में खुशियों की चमक देने वाले,  आज उदासी का आलम दे गए |
छोटी - सी बात का तल्ख क्यूँ इतना,  प्यार के वादे का हर जुमला झूठे हो गए |
इश्क में जला करते थे जो दिन - रात,  अब वो परवाने नफ़रत में जल गए |
हो जाती सुलह माफ़ी दिल में रखने से,  वो तो अपनी जिद के पैमाने हो गए|
हार में ही होती है, मुहब्बत की जीत
जीतने की जुस्तजू में वो जुदा हो गए |
दिल  धड़कता था जिसके लिए हर पल,  वह दिल अब खौफ में गमजदा हो गए|
पहुंच जाते थे मेरी खामोशी में जो मुझ तक,  वो आज लफ्जों में अलविदा कह गए||
(स्वरचित)
:- तारा कुमारी More Poem you may like..1. एहसास 2. उलझन 3. यादें 4. नहीं हारी हूँ मैं

जलेबी Jalebi - A Hindi short - story

जलेबी        स्कूल से आती परेड एवं देशभक्ति गीतों की सुरीली आवाजें कुसुम को घर में भी साफ़ - साफ़ सुनायी दे रही थी |       वह 15 अगस्त, स्वतंत्रता-दिवस का दिन था |बिल्कुल पास में ही स्कूल था|कुसुम एक गृहिणी है उसका एक बेटा है - शुभम, जो लगभग 4 वर्ष का है |       सुबह उठते ही शुभम स्कूल के लिए तैयार होने की जिद कर समय से पहले ही तैयार होकर बैठ गया |       आखिरकार, कुसुम ने खुदको जल्दी से तैयार किया और शुभम को स्कूल छोड़ आयी |
       कुसुम का घर सड़क के एक ओर था तो दूसरी ओर स्कूल था |करीब 200 मीटर की दूरी होगी ¦कुसुम स्कूल पास होने के कारण खुश थी कि वह बच्चे को स्कूल छोड़ने ले जाने में कम समय लगता |
      लेकिन हाईवे के कारण सड़क पर चलने वाली गाड़ियों की लाइन लगी रहती तथा आए दिन कोई न कोई दुर्घटना भी होती रहती|
       शुभम के स्कूल जाने के बाद कुसुम घर के कामों को निपटाने लगी| झंडोत्तोलन के बाद शुभम के स्कूल में कुछ प्रोग्राम  होने वाले थे, उसके बाद छुट्टी|
      दिन के 11:00 बज चुके थे कुसुम घर के सभी काम निपटा कर शुभम के स्कूल जाने की तैयारी करने लगी तभी उसे बाहर कैंपस के गेट के खुलन…

किताब की व्यथा Kitab ki vyatha -Hindi poem

किताब की व्यथा 
दूर बैठी एक स्त्री सिसकती देख, कदम बढ़ गए उस ओर  कंधे पर रखकर हाथ पूछा मैंने - कौन है तू? क्यूं रोती है तू वीराने में? सुबकते हुए कहा स्त्री ने - किताब हूँ मैं... त्याग दिया है मुझे जग ने  बचपन की सुखद सहेली को भुला दिया है सबने..
चंदा मामा, नंदन, सुमन - सौरभ चाचा - चौधरी और नागराज बच्चों का दिल बहलाया मैंने  परियों की कहानी सुनायी  जंगल - बुक की दुनिया दिखाई मैंने नवयुवायों के  प्रेमसिक्त पुष्प को अपने आलिंगन में छुपाया मैंने  सूखे पुष्पों को वर्षों पन्नों में  याद बना कर संजोया मैंने..
कभी कथा - उपन्यास बनकर मुस्कान चेहरे पर खिलाया मैंने इतिहास, भूगोल, चांद - तारे समझाया मैंने.. सिसकती स्त्री ने देह पर लगी धूल दिखाया शब्दों से अपना ज़ख्म मुझे बतलाया सुनकर मेरी तन्द्रा  भंग हुई  सोती हुई से मैं जाग पड़ी  अरे..! ये क्या सपने में बात हुई! किताब से मेरी मुलाकात हुई |
सत्य थी ये व्यथा कथा  हैरान होकर ढाढस बंधाया मैंने  मन ही मन कहा मैंने - बेकार ही दुखी तुम होती हो  आज भी मेरे सिरहाने तुम सोती हो  रोज सुबह - शाम साथ मेरे रहती हो, ज्ञान के अखंड - ज्योत तुम जलाती हो…