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Showing posts from April, 2020

सूक्ष्म - शत्रु sukshhm-shatru - Hindi poem

सूक्ष्म - शत्रु है जगत में सूक्ष्म - शत्रु का वार चारो तरफ है फैला  हाहाकार  है बड़ा ये covid-19 विध्वंसकारी अमेरिका, इटली, चाइना सब पर  पड़ गया ये कोरोना वाइरस भारी
छुने से फैले ये, साँसों से फैले  ऐसी है ये महामारी.  कट गए हम दुनिया से  पर कोरोना का है आतंक जारी वाइरस ने लिया सहारा उनका हम से जो हो जाती लापरवाही  ना अन्तर करे ये मजहब की ना अमीरी - गरीबी की समता है इसका उसूल  यह बीमारी है जहान की 
है भयावह दृश्य अब बनता हर तरफ है संक्रमण बढ़ता  आम आदमी कैसे रहें सुरक्षित  नर्स डॉक्टर स्टाफ हुए संक्रमित  देश दुनिया हो रहे बर्बाद  कैसी विडंबना बन पड़ी है आज  बढ़ती जा रही अवधि लॉकडाउन की  आँधी-सी चल रही मन में  आशा - निराशा की. 
है विचलित करने वाली इसका प्रहार पर हमने भी नहीं मानी है हार  हाथ धोना, सोशल - डिस्टेंशिंग है यही कल्याणकारी.  रहो घर के अंदर  करते रहो खुदको सेनेटाइज यही है मांग सुरक्षा की 
है तोड़ना कड़ी - संक्रमण का  लॉकडाउन का पालन  है रास्ता बचने का खुद की करो सुरक्षा और करो सब की परवाह  यही है मूलमंत्र - इसे खत्म करने का |

(स्वरचित)
:तारा कुमारी
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कुछ पंक्तियाँ "नवोदय" के नाम - HINDI POEM

कुछ पंक्तियाँ "नवोदय" के नाम..   वो हसीन नवोदय की जिंदगानी ना मिली फिर वैसी कहानी

जब रखे थे अपने नन्हें कदम
नवोदय के आँगन मे
ऊँची बिल्डिंग और एक कैम्पस
ख़ुद के जैसे थे कुछ, कुछ थे निराले दोस्त
शिक्षक थे माता-पिता समान
साथी थे भाई - बहन

सुबह सुबह मैदान का चक्कर
करते पी.ई. टी मिलकर सब
कुछ करते मन लगाकर
कुछ करते शैतानी
सुबह की धुंध मे कुछ
खुदको छुपा लेते

भागमभाग होती फिर असेंबली की
पर पहुंच ही सब जाते
नाश्ते के लिए लगती लंबी  लाईन
पर फिक्र ना होती ग़र दोस्त हो अपना
चाहे कोई कुछ कहे, बीच मे शान से घुस जाते
मिले थे चम्मच, लेकिन स्वाद
हाथ से खाने से ही आते
छुप छुपाकर खाने की थाली
हॉस्टल मे ले जाते
बीच में पड़ता वार्डेन का क्वाटर
बचते बचाते निकल जाते

सेल्फ स्टडी भी होती मस्ती भरी
जो स्कूल का गेट छु लेते कभी
तो लगता मैदान मार लेते
त्यौहार मिलकर सब  मनाते
होली दिवाली खूब मजे करते

कुछ भूली बिसरी यादें
दोस्तों के मिल जाने से हो जाती ताजा
नाम ही काफी है 'नवोदय' का
पनप जाता अपनापन अजब सा

जिस दिन निकले पलट कर देखा स्कूल को
साथ छुट गया सालों का
आज भी होती आंखे नम
था रिश्ता मासूमियत…

तमन्ना Tamanna - A Hindi short-story

तमन्ना (कई बार हम अपने पास जो कुछ होता है उसकी कदर नहीं करते और उसकी उपेक्षा करते हैं |किन्तु, उसकी अहमियत उन लोगों की नजरों से देखनी चाहिए जो उस कमी से गुज़रते हुए जीते हैं |आज ऐसी ही एक कहानी आप सब के सामने है |)         तमन्ना, प्यारी-सी 4 वर्ष की एक छोटी सी बच्ची है. जिसकी दुनिया उसकी नानी और एक मामा तथा एक मौसी मे सिमटी हुयी है.        उसकी माँ उसे जन्म देते ही भगवान को प्यारी हो गयी थी. नन्ही अबोध बच्ची को देखकर सबकी आँखों में आँसू थे. उसके और भी भाई - बहन थे, पिता भी थे किंतु तमन्ना की नानी ने स्वयं बच्ची के लालन - पालन का बीड़ा उठाने का निर्णय लिया.        तब से तमन्ना अपनी नानी के साथ ही पली - बढ़ी और घर के सभी सदस्यों याने मामा, मौसी, नानी के आँखों की तारा बन चुकी है. तमन्ना के नानाजी पहले ही गुज़र चुके हैं.        तमन्ना, अपनी नानी को ही माता-पिता का दर्जा देती है उससे अथाह स्नेह और ममता प्राप्त करती है.        मामा भी कुछ कम नहीं थे. तमन्ना के साथ खूब मस्ती करते. उसके साथ बच्चे बन जाते. कभी कटहल दिखाकर तमन्ना को भ्रमित करते कि देखो तुम्हारे लिए इत…

निःशब्द NISHABD - HINDI POEM

निःशब्द  गरीबी की मार कहें  या प्रशासन की हार  आम आदमी सहे सौ प्रहार |
पैदल ही चल दिये मीलों घर के लिए  ना हो सका कोई प्रबंध  दे दी जान करीब घर के पहुंचकर  कोरोना के संहार में छिपे हैं ऐसे मर्म  गरीबी की मार कहें
या प्रशासन की हार
आम आदमी सहे सौ प्रहार |

प्रसव - पीड़ा सहती  स्त्री
लगी सौ सौ बंदिशें
कोई रोक ना पाए उन मुसाफिरों को
जो लिए चले गले में कोरोना का हार
गरीबी की मार कहें
या प्रशासन की हार
आम आदमी सहे सौ प्रहार |

जिस जेब में होती थी मेहनत की कमाई
है आज दो सुखी पावरोटी
काम धंधे हुए ठप, पर मिल गए दाल - भात
है समाज सेवियों और सरकार की ये उपकार
गरीबी की मार कहें
या प्रशासन की हार
आम आदमी सहे  सौ प्रहार |

(स्वरचित)
:तारा कुमारी
Nishabd-Hindi poem Garibi ki Maar Kahen Ya prashasan Ki Haar,  Aam aadami Sahe sau Prahar.

Paidal hi Chal Diye milon ghar ke liye
Na Ho Saka Koi prabandh
De Di Jaan Kareeb Ghar Ke pahunch kar corona ke sanghar mein chhipe hain aise marm,
Garibi Ke Mar kahen
Ya prashasan Ki Haar
Aam aadami Sahe sau Prahar.

Prasav pida Sahti stree
Lagi sau sau Bandishen
Koi ro…

नारी, अब तेरी बारी है| Nari, ab teri bari hai. - HINDI POEM

नारी,अब तेरी बारी है| कोरोना से जंग जारी है  नारी,अब तेरी बारी है|
ना मायूस होना, हारेगा ये कोरोना इतिहास गवाह है -  जब जब आई है बला देश में मोर्चा संभाला है सबला ने कभी लक्ष्मीबाई ,कभी रजिया सुल्तान ने ।।
कोरोना से जंग जारी है  नारी, अब तेरी बारी है।
खत्म होगा यह जहर दूर होगा कोरोना का कहर  आबाद होंगे गांव गली शहर ना हिम्मत हारना तू यह काला वक्त भी बीत जाएगा ।।
कोरोना से जंग जारी है  नारी, अब तेरी बारी है ।
आदमी गर ना समझे,  लॉकडाउन का मतलब गली मोहल्लों में भीड़  ,जो दिखे तेरा तेज देखे दुनिया यह सारी है।।
कोरोना से जंग जारी है  नारी,अब तेरी बारी है।
नमन उन बहनों को जो  लेकर लठ निकल पड़ी घर से बाहर समझाने उन हठी पुरुषों को है समता- जागरूकता अब आयी है।।
कोरोना से जंग जारी है नारी,अब तेरी बारी है।।
(स्वरचित) :-तारा कुमारी (यह कविता उन ग्रामीण बहनों को समर्पित है जो लॉकडाउन को सफल बनाने की कोशिश में अपने आस-पास के क्षेत्रों में अपना योगदान दे रही हैं।)


Nari ,ab teri bari hai.
Corona se jung jari hai Nari,ab teri bari hai.
Na mayus hona,harega ye corona Itihaas gawah hai - Jab jab aayi h…

यादें Yaadein Hindi Poem

यादें कलरव करती सहस्त्र यादें उमड़ती घुमड़ती मानस पटल पर कुछ खट्टी कुछ मीठी कुछ गुदगुदाती कुछ उदास कर जाती|
जब मुड़कर देखो पीछे गिरते संभलते हर कदम  जब हम चले थे, कुछ राह छूट गए कुछ छोड़ दिए गए पर रह गई यादें बनकर मुस्कान बनकर याद||
कलरव करती सहस्त्र यादें  उमड़ती घुमड़ती मानस पटल पर  कुछ खट्टी कुछ मीठी कुछ गुदगुदाती कुछ उदास कर जाती |
मन को चुभती,मन को सहलाती  यह रंगीली अनगिनत यादें  पड़ा वक्त का मरहम कभी वक्त ने दिया जख्म कभी  चलती फिरती यह यादें  कभी खामोशी में,कभी बातों में, गले लग जाती यादें||
कलरव करती सहस्त्र यादें उमड़ती घुमड़ती  मानस पटल पर  कुछ खट्टी कुछ मीठी  कुछ गुदगुदाती कुछ उदास कर जाती |
क्रोध-शिकवे भी बन गए मुस्कान  बन गए हंसी ठहाके कभी रूठ कर दूर बैठ जाना  कभी मनाने पर ही मानना ना मिले कोई तो खुद ही मान जाना  मित्रों परिवार संग जीवन की मस्ती||
कलरव करती सहस्त्र यादें उमड़ती घुमड़ती मानस पटल पर कुछ खट्टी कुछ मीठी  कुछ गुदगुदाती कुछ उदास कर जाती |
कभी जीवन में कुछ पाने की खुशी कभी सब खो जाने का डर  कभी इतराते इठलाते हम खुद पर  कभी किसी के जाने का अफसोस  कभी किसी के मिल…

डॉक्टर,नर्स और अस्पताल Doctor Nurse Aur Aspatal Hindi Poem

डॉक्टर, नर्स और अस्पताल जज्बे को रखना कुछ इस तरह उंगलियां ना,काँपे भीड़ देखकर
महामारी फैला रही अपनी चादर तू कर दे इसकी सीमा तय ऊपर एक ईश्वर है, नीचे तू भी कुछ कम नहीं  डॉक्टर ,नर्स और अस्पताल  चलेंगे हम सब मिलाकर ताल|
ना रखे कोई द्वेष जाति धर्म देख ऐसी है इस पेशा का सर्वधर्मभाव  फिर क्यों हम रखे मन में क्लेश  ये हिंदू वो मुस्लिम, ये इसाई वो सिख|
आओ करें सामना आफत का  करके दृढ़ निश्चय..  करे लोक डाउन का पालन,  बनाकर हृदय में जगह  दूरी रखना है मजबूरी पर दिलों में रिश्ते रखना पूरी| 
यही है सद्भाव इस युद्ध की  रहना हर क्षण बनकर मनमीत सबकी  डॉक्टर, नर्स और अस्पताल  चलेंगे हम सब मिलाकर ताल  देखे, क्या कर लेगा यह महामारी रूपी काल!

(स्वरचित)
:-तारा कुमारी
( मेरी यह कविता डॉक्टर, नर्स और अस्पताल के सभी स्टाफ एवं कोरोना महामारी  के विरूद्ध युद्ध में लगे प्रत्येक सैनिक, योद्धाओं को समर्पित है|)

Doctor, nurse aur aspatal - HINDI POEM Jajbe ko Rakhna Kuch Is Tarah  ungaliyan na kanpen Bheed Dekhkar 
mahamari faila Rahi Apni Chadar tu kar de iski Sima tai  Upar Ek Ishwar Hai, niche Tu Bhi Kuchh Ka…

डायरी Diary - A Hindi Short Story

डायरी  सहसा, ठीक पीछे किसी के होने की आहट से मालती पलट कर देखी तो 10 वर्षीय उसका पुत्र अंकित आंखों में निश्छलता लिए कुर्सी के पीछे खड़ा मुस्कुरा रहा था |

रोज की अपनी दिनचर्या पूरी करके घर की जिम्मेदारियों से निपट कर डायरी लिखना मालती की दिनचर्या में शामिल थी| मालती ने अपनी डायरी बंद करते हुए बेटे से पूछा - नींद नहीं आ रही है?

"मम्मी मुझे भी एक डायरी दीजिए ना, मुझे भी आपकी तरह जरूरी बातों को डायरी में लिखना है|" जवाब में अंकित ने एक सांस में ही अपनी बात कह दी |

अंकित की बातें सुनकर मालती ने बेटे को स्नेहपूर्वक देखते हुए पास पड़ी एक नई डायरी उठाकर उसके हाथों में थमा दिया | यह देखते ही अंकित की आंखों में चमक आ गई| वह खुशी से थैंक्यू मम्मी कह कर कमरे से तेजी से निकल गया|

    बेटे को जाते देखने के साथ ही मालती की नजर दीवार पर लगी घड़ी पर पड़ी| रात के 10:00 बज रहे थे| जल्दी जल्दी सब कुछ समेट कर बिस्तर पर आकर लेट गई| पास में छोटा बेटा अब तक सो चुका था वह 6 वर्ष का है|

    लगभग 1 महीने के बाद| रोज की तरह मालती सुबह अंकित के कमरे में झाड़ू लगाने आई| उसके बुक शेल्फ कुछ बिखरे से थे| …

वक्त और त्रासदी Time and Tragedy A Hindi Poem

वक्त और त्रासदी अनवरत बहती ये समय की धारा  नमन करे जिसे जग सारा | ना ठहरे ना सुस्ताए  ना वापस लौट कर आए ये बस अपनी निशां छोड़ जाए ये| लाख बिछा लो चाहे तुम निगाहें  गुजर जाए जो, नहीं आते वो लम्हें  ऐसी अनुशासित हैं ये लहरें | इसकी एक डगर है, एक लक्ष्य आगे बढ़ना, नहीं है थकना| पाठ पढ़ा कर जताए अपनी महत्ता  बेजुबान है ये,कौन इसे है कहता?  जो ले ले सीख,वो बने महान  यह वक्त है बड़ा बलवान | जो ना समझे इसकी अहमियत  वह रह जाए खाली हाथ  मित्र, प्रियजन की क्या बात किस्मत भी छोड़ जाए साथ|  वक्त से आगे चलने की होड़  शांति,अहिंसा,प्रकृति की सुरक्षा छोड़ मानव ने किया जब जब इस पर प्रहार जीत का तो पता नहीं,  मिली है हर बार ही हार| सिसकती आवाजें,लहूलुहान धरती हैं इसके गवाह -  कभी परमाणु बम, भूकंप, सुनामी बाढ़,सूखा, वर्ल्ड वार  कभी हैजा कभी चेचक कभी कोरोना का वार| त्राहि-त्राहि कर रहा पूरा संसार प्रकृति की है यही पुकार,  वक्त ने दे दिया है संदेश -  मानव तू हद में रह,  तभी होगी खुशियां अपार  तभी होगी मानवता की जय जय कार||
(स्वरचित)
-तारा कुमारी (आज पूरा संसार जिस त्रासदी से गुजर रहा है उससे मर्माहत होक…

नहीं हारी हूं मैं Nahi Haari Hun Main - Hindi Poem

नहीं हारी हूं मैं | चली थी, एक अनजान राह पर  बेशक, मंजिल का पता न था  पर कुछ ख्वाब सजे थे, दिल मे  नन्ही - सी जान और कोई साथ न था |
बेख़बर थी, दुनिया पत्थर की है  यूँ ही यहाँ कोई अपनी -  एक मुस्कराहट भी नहीं लुटाता  टकरा गयी उन पलों से मैं,  खबर ही ना हुई - 
सारे ख्वाब, कब खो गए उनमें,  बदल गयी दुनिया मेरी  रह गया तो बस इक चेहरा,  टूटे ख्वाब, टूटे वजूद और  आंसुओं का सैलाब |
सहसा, धीमी - धीमी दबी - घुटी-सी एक चीख कानों पर पड़ने लगी -  खो रही हूँ मैं.. खो रही हूँ मैं | क्या खुद को पा सकूंगी वापस? 
इस सवाल से जुझते-जुझते कहीं अंतर्मन से आवाज आयी -  आशाओं के समंदर से -  इक बूंद जुटाकर, अब तक जी रही हूँ मैं |
वक्त भले कम पड़ जाए,  सफर चाहे अधूरा रह जाए, उठूंगी फिर, चलूंगी फिर- नहीं हारी हूं मैं, नहीं हारी हूं मैं||

(स्वरचित)
: तारा कुमारी Nahi haari hun main.  Chali thi ek anjaan raah par Beshaq, manzil ka pata na tha  Par kuchh khwaab saje the,dil me Nanhi-si jaan aur koi sath na tha. 
Bekhabar thi, duniya pathar ki hai.  Yun hi yhan koi apni -  Ek muskurahat bhi nahi lutata Takra gyi un…

एहसास EHSAAS Poem in Hindi

एहसास  जाने क्यूँ ये, एहसास है  तू दूर होकर भी पास है |
जाने क्या थी, तेरी मजबूरी जो लिख दी यह दूरी|
कोई शिकवा नहीं, तेरे वास्ते  मान लिया, जुदा है मेरे रास्ते|
बस, आंखों में एक नमी - सी है  शायद ये, तेरी कमी है|
फिर भी..  जाने क्यूँ, ये एहसास है तू दूर होकर भी, पास है|
EHSAAS Poem in Hindi Jane kyun ye, ehsaas hai..! Jane kyun ye, ehsaas hai.. Tu dur hokar bhi, paas hai.
Jane kya thi, teri majburi.. Jo likh di, ye doori.
Koi shikwa nahi, tere vaste.. Maan liya, juda hain mere raste.
Bas, aankhon me ek nami hai.. Shayd ye, teri kami hai.
Phir bhi.. Jane kyun,ye ehsaas hai.. Tu dur hokar bhi, paas hai.!!